बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार विधान परिषद यानी एमएलसी की 8 सीटों के चुनाव में पटना की 2 सीटें इन दिनों काफी चर्चा में हैं। वजह हैं दो पुराने चेहरे, जिनकी नजर अपनी जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने पर है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए समर्थित जनता दल (युनाइटेड) यानी जद(यू.) के मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार लगातार चौथी जीत की प्रयास में हैं। जबकि, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा के मौजूदा एमएलसी प्रो.नवल किशोर यादव छठी बार जीतना चाहते हैं। लेकिन, इस बार दोनों नेता के सामने विपक्षी दलों के अलावा ऐसे चुनावी समीकरण भी हैं, जिन पर उनकी नजरें टीकी है।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जद(यू.) प्रत्याशी नीरज कुमार के सामने पीके की जन सुराज पार्टी यानी जसुपा प्रत्याशी डॉ.अनुज कुमार सिंह और राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद के दमदार प्रत्याशी दिलीप कुमार हैं। दूसरी ओर, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी प्रों.नवल किशोर यादव को कभी जद(यू.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के करीब रह चुके राजद प्रत्याशी डॉ.संजीव कुमार सिंह और देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार रह चुके जसुपा के संस्थापक से पहली बार बांकीपुर के विधायक बने प्रशांत किशोर यानी पीके के दल जसुपा की प्रत्याशी डॉ.दिव्या ज्योति से मुकाबला करना है। इन दोनों सीटों पर सवाल सिर्फ पुराने प्रत्याशियों के अनुभव का नहीं है। असली सवाल यह भी है कि क्या वे अपने पुराने समर्थकों को साथ रख पाएंगे और विरोधी प्रत्याशियों के बीच बन रहे समीकरणों का सामना कर पाएंगे? यह तो चुनाव के दिन ही पता चल सकता है। वैसे इन दोनो क्षेत्रों में मुकाबला त्रिकोनात्म है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की हार के बाद एनडीए एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है और बैठकों का दौर जारी है। जबकि, महागठबंधन में बिखराव साफ दिखाई दे रहा है। क्योंकि, कांग्रेस ने भी अपना प्रत्याशी चुनावी दंगल में उतार दिया है।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। इस बार उनका लक्ष्य जीत का चौका लगाना है। लेकिन, मुकाबले में जसुपा के डॉ.अनुज कुमार सिंह और राजद के दिलीप कुमार की मौजूदगी ने चुनावी गणित को चर्चा में ला दिया है। नीरज कुमार के लिए सबसे ज्यादा चर्चा मोकामा के बाहुबली जद(यू.) विधायक अनंत कुमार सिंह के रुख को लेकर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जद(यू.) विधायक अनंत सिंह ने पीके की दल जसुपा के प्रत्याशी डॉ.अनुज कुमार सिंह का समर्थन किया है। वह डॉ.अनुज सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार व रोड शो तक कर रहे हैं। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ दो प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और वोटरों तक पहुंच बनाने की प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।
जसुपा प्रत्याशी डॉ.अनुज सिंह और जद(यू.) विधायक अनंत सिंह के समर्थन से मौजूदा एमएलसी व जद(यू.) प्रत्याशी नीरज कुमार के वाटरों पर कितना असर पड़ेगा, इसका अभी कोई पक्का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन, अगर डॉ.अनुज सिंह स्नातक वोटरों के एक हिस्से तक अपनी पहुंच बना लेते हैं, तो नीरज कुमार के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है। यही वजह है कि इस सीट पर जद(यू.) विधायक अनंत सिंह की भूमिका को अहम माना जा रहा है। हालांकि, किसी नेता का समर्थन मिलना और वोटरों का वोट मिलना दो अलग बातें हैं। अंतिम तस्वीर वोटिंग के बाद ही साफ होनी है।

जद(यू.) प्रत्याशी नीरज कुमार के सामने दूसरी चुनौती राजद के दिलीप कुमार की है। राजद ने उन्हें पटना स्नातक सीट से पहली बार प्रत्याशी बनाया है। दिलीप कुमार कुर्मी समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी को जातीय समीकरण के लिहाज से भी देखा जा रहा है। राजद की रणनीति के बारे में राजनीतिक आकलन यह है कि दल अपने परंपरागत यादव-मुस्लिम समर्थन के साथ कुर्मी वोटरों के बीच भी जगह बनाने की कोशिश कर सकती है। अगर दिलीप कुमार को कुर्मी स्नातकों का अच्छा समर्थन मिलता है, तो इसका असर नीरज कुमार के वोटों पर पड़ सकता है। यह मान लेना सही नहीं होगा कि किसी समुदाय के सभी वोटर एक ही प्रत्याशी को वोट दें सकते हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पहचान, वोटरों से सम्पर्क और स्थानीय मुद्दे भी अहम हो सकते हैं। इसलिए नीरज कुमार के सामने चुनौती केवल विरोधी प्रत्याशियों से मुकाबला करने की नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को अपने पक्ष में बनाए रखने की भी है।
जद(यू.) प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थन में बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके राज्यसभा सांसद व जद(यू.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ-साथ मंत्री पुत्र निशांत कुमार का समर्थन प्राप्त है। नीतीश पुत्र राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अभी तक नालंदा, नवादा, बख्तियारपुर व पटना में चुनाव प्रचार कर चुके हैं। चुनाव के दौरान बड़े नेताओं और दल से जुड़े प्रमुख चेहरों का प्रचार प्रत्याशियों को समर्थन जुटाने में मद्द कर सकता है। लेकिन, चुनाव प्रचार का असर कितना होगा, यह वोटरों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। नीरज कुमार के लिए यह देखना अहम होगा कि दल का समर्थन और उनका अपना चुनावी अनुभव विरोधियों की चुनौती को कितना कम कर पाता है। पटना स्नातक सीट से तीन बार जीत चुके मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार के सामने इस बार चौथी जीत दर्ज करने का लक्ष्य है। उनके पुराने वोटरों का समर्थन, नाराज चल रहे जद(यू.) विधायक अनंत सिंह का रुख और राजद नेता दिलीप कुमार की उम्मीदवारी इस सीट के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा एमएलसी व भाजपा प्रत्याशी प्रो.नवल किशोर यादव लगातार छठी बार जीतने की फिराक में हैं। इस सीट पर नाम वापसी के बाद कुल 18 प्रत्याशी चुनावी दंगल में बचे हैं। इनमें पूर्व विधायक व राजद प्रत्याशी डॉ.संजीव कुमार सिंह और जसुपा प्रत्याशी डॉ.दिव्या ज्योति प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं। मौजूदा एमएलसी प्रो.नवल किशोर यादव का चुनावी अनुभव उनके लिए अहम हो सकता है। लेकिन, इस बार मुकाबले में कई प्रत्याशियों की मौजूदगी वोटों के बंटवारे की ज्यादा संभावना भी है। प्रो.नवल किशोर यादव के सामने अपने समर्थकों को एकजुट रखने और विरोधी प्रत्याशियों की चुनौती का सामना करने का सवाल है। एमएलसी चुनाव में उनकी पकड़ कितनी मजबूत रहती है, यह शिक्षक वोटरों के रुख से तय होना है।
राजद ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ.संजीव सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वह पूर्व में 17वीं बिहार विधानसभा में खगड़िया जिले के परबत्ता से जद(यू) के विधायक रह चुके हैं। उनकी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा है कि पुराने राजनीतिक सम्पर्क और राजद का समर्थन उन्हें चुनाव में मद्द दे सकते हैं। डॉ.संजीव सिंह भूमिहार समुदाय से आते हैं। इस वजह से उनके और दूसरे प्रत्याशियों के बीच वोटरों के समर्थन को लेकर कई तरह के आकलन किए जा रहे हैं। लेकिन, यह तय नहीं है कि भूमिहार समुदाय के सभी वोटर किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में ही वोटिंग करेंगे। भाजपा प्रत्याशी प्रो.नवल किशोर यादव के लिए चुनौती यह होगी कि वे अपने अनुभव और पुराने सम्पर्कों के आधार पर वोटरों का समर्थन बनाए रखें। वहीं, डॉ.संजीव सिंह को अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए चुनाव प्रचार और वोटरों तक पहुंच बनाने पर निर्भर रहना होगा।

पटना शिक्षक सीट पर जसुपा ने डॉ.दिव्या ज्योति को प्रत्याशी बनाया है। वह बाढ़ की रहने वाली हैं और भूमिहार समुदाय से ही ताल्लुक रखती हैं। राजद प्रत्याशी डॉ.संजीव सिंह भी इसी समुदाय से आते हैं। इस वजह से दोनों प्रत्याशियों के बीच वोटरों के समर्थन को लेकर खूब चर्चा हो रही है। अगर दोनों प्रत्याशी एक ही वर्ग के वोटरों के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करते हैं, तो वोटों का बंटवारा मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर वोटिंग के बाद ही समझ में आएगा। जसुपा प्रत्याशी डॉ.दिव्या ज्योति की मौजूदगी प्रो.नवल किशोर यादव के लिए कितनी चुनौती बनती है, यह केवल उनकी सामाजिक पहचान से तय नहीं होगा। उनकी चुनावी पहुंच, वोटरों से सम्पर्क व चुनाव प्रचार भी अहम होंगे।
पटना शिक्षक सीट पर महागठबंधन का बिखराव भी देखने को मिल रहा है। जहां कांग्रेस पार्टी ने संजय यादव को चुनावी दंगल में उतार दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी संजय यादव की मौजूदगी को यादव वोटरों के बीच समर्थन के संभावित बंटवारे के नजरिये से देखा जा रहा है। एमएलसी चुनाव में वोटरों का व्यवहार केवल जाति या दल के आधार पर तय नहीं होता है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि संजय यादव की उम्मीदवारी से किस प्रत्याशी को कितना फायदा या नुकसान होगा। पटना स्नातक सीट पर जद(यू.) प्रत्याशी नीरज कुमार के सामने जसुपा प्रत्याशी डॉ.अनुज सिंह और राजद प्रत्याशी दिलीप कुमार की चुनौती है। वहीं, पटना शिक्षक सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रो.नवल किशोर यादव को राजद प्रत्याशी डॉ.संजीव सिंह, जसुपा प्रत्याशी डॉ.दिव्या ज्योति व अन्य प्रत्याशियों से कड़ा मुकाबला करना है। दोनों सीटों पर पुराने प्रत्याशियों के पास चुनावी अनुभव जरूर है। लेकिन, इस बार उनके सामने नए समीकरण और कई प्रतिद्वंद्वी हैं। नीरज कुमार के मामले में अनंत सिंह का समर्थन और दिलीप कुमार की उम्मीदवारी चर्चा में है। जबकि, प्रों.नवल किशोर यादव के सामने कई प्रत्याशियों के बीच वोटरों का समर्थन प्राप्त करने की चुनौती है। अब देखना है कि 23 अक्टूबर को वोटिंग के दिन ‘ऊंट’ किस करवट वैठता है। यह तो चुनाव परिणाम के दिन 27 अक्टूबर को ही लोगों के सामने आना है।









