National (नितिन): हिमाचल प्रदेश से दिल्ली रूट पर जाने वाले हिमाचल पथ परिवहन निगम के चालकों और परिचालकों में निगम प्रबंधन के एक नए फरमान को लेकर भारी रोष पनप गया है। दिल्ली के राजघाट डिपो में बसों की पार्किंग को लेकर पहले से ही परेशान क्रू मेंबर्स अब ड्रेस कोड और अनुशासन को लेकर जारी किए गए नए निर्देशों से भड़क गए हैं। निगम प्रबंधन ने निर्देश जारी किए हैं कि राजघाट डिपो में चालक-परिचालक बनियान व निक्कर में न घुमें, जिस पर चालकों-परिचालकों ने दिल्ली की तपती गर्मी में राजघाट डिपो में मिलने वाली बदतर सुविधाओं की पोल खोलते हुए प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
डीटीसी ने की थी एचआरटीसी प्रबंधन से शिकायत
दरअसल, यह पूरा विवाद दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (डीटीसी) की एक शिकायत के बाद शुरू हुआ। डीटीसी प्रबंधन ने एचआरटीसी को शिकायत दी थी कि दिल्ली स्थित राजघाट पार्किंग और डिपो परिसर में हिमाचल के कुछ चालक-परिचालक कूड़ा फैला रहे हैं। इसके अलावा यह भी शिकायत की गई कि क्रू मेंबर्स परिसर में बनियान और निक्कर में घूमते हैं, जो कार्यालय की मर्यादा और अनुशासन के खिलाफ है। इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एचआरटीसी प्रबंधन ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि दिल्ली जाने वाले स्टाफ को ड्यूटी और विश्राम के दौरान उचित वेशभूषा व पेशेवर आचरण बनाए रखने की सख्त हिदायत दी जाए।
50 डिग्री की गर्मी और रैस्ट रूम में पानी तक नहीं
प्रबंधन के इन निर्देशों के बाद चालकों-परिचालकों का गुस्सा फूट पड़ा है। धर्मशाला, कांगड़ा, शिमला और मंडी सहित विभिन्न जिलों से दिल्ली जाने वाले स्टाफ का कहना है कि दिल्ली में तापमान 45 से 50 डिग्री के बीच है। ऐसे भयंकर तापमान में राजघाट डिपो में आराम करने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन केवल वेशभूषा पर सख्ती कर रहा है, जबकि रैस्ट रूम में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। कई बार तो वहां पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं होता, जिससे तपती गर्मी में रैस्ट रूम में रुकना असंभव हो जाता है।
सुबह 7 बजे से पहले डिपो में एंट्री नहीं, बाहर सोने को मजबूर स्टाफ
कर्मचारियों ने पार्किंग की समय-सीमा को लेकर भी बड़ा खुलासा किया है। क्रू मेंबर्स के अनुसार राजघाट डिपो में एचआरटीसी की बसों को केवल सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक पार्क करने की अनुमति है, जबकि हिमाचल से चलने वाली बसें तड़के 3 से 5 बजे के बीच दिल्ली पहुंच जाती हैं। डिपो बंद होने के कारण थके-हारे चालकों-परिचालकों को मजबूरन डिपो के बाहर ही बसें खड़ी करनी पड़ती हैं और गर्मी से बचने के लिए वे बाहर ही बनियान व निक्कर में लेटकर आराम करते हैं। सुबह 7 बजे डिपो खुलने के बाद ही वे बसें अंदर ले जा पाते हैं।






