पंजाब (नितिन): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 3 अगस्त को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) के बकाये को जारी करने के लिए निर्धारित 15 दिन की समय-सीमा आज, 18 अगस्त को समाप्त हो रही है। इसके बावजूद, AAP के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल और बिना किसी शर्त के पालन सुनिश्चित करने के बजाय न्यायिक आदेश के रास्ते में प्रशासनिक अड़ंगा डालकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश की खुले तौर पर अवहेलना कर रही है। यह बात भारतीय जनता पार्टी, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों ने कही।
इस संबंध में विस्तार से बताते हुए ढिल्लों ने कहा, “वित्त विभाग द्वारा 17 अगस्त, 2026 को जारी पत्र में सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे हाई कोर्ट के सिविल रिट याचिका संख्या 7291/2026 में दिए गए फैसले से उत्पन्न आदेशों को वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना लागू न करें। यह ऐसी शर्त लगाने के समान है, जो हाईकोर्ट के न्यायिक आदेश का हिस्सा ही नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसा प्रशासनिक निर्देश संवैधानिक अदालत द्वारा जारी आदेश को न तो पलट सकता है, न कमजोर कर सकता है, न इसमें देरी कर सकता है और न ही इसके अनुपालन को टाल सकता है। कार्यपालिका किसी न्यायिक निर्देश के खिलाफ अपील की तरह विचार नहीं कर सकती और न ही उसके अनुपालन से पहले अतिरिक्त प्रशासनिक स्वीकृति की कोई नई परत जोड़ सकती है।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जब अदालत ने निर्देशों का पूरी तरह पालन करने का निर्देश दिया है, तो सरकार द्वारा किसी आंतरिक विभागीय परिपत्र के माध्यम से न्यायिक आदेश पर पुनर्विचार करने, उसमें शर्त जोड़ने या उसे चुनिंदा रूप से लागू करने की कोई गुंजाइश नहीं है। ढिल्लों ने कहा, “यह अनुपालन न करना पूरी तरह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली ‘आप’ सरकार न केवल कर्मचारी-विरोधी और पेंशनर-विरोधी है, बल्कि उसे माननीय हाईकोर्ट के आदेशों की भी कोई खास परवाह नहीं है।”
ढिल्लों ने कहा, “भगवंत मान और हरपाल चीमा को समझना चाहिए कि सरकारी कर्मचारी किसी एहसान, सब्सिडी या राजनीतिक तोहफे की मांग नहीं कर रहे हैं। वे उस धन की मांग कर रहे हैं, जो कानूनन और जायज़ तौर पर उनका हक है।” ढिल्लों ने पूछा, “सवाल सीधा है: अगर पंजाब सरकार प्रचार, विज्ञापनों और राजनीतिक ब्रांडिंग पर पैसा खर्च कर सकती है, तो वह कर्मचारियों को उनका वेतन और डी.ए. का बकाया क्यों नहीं दे सकती, जिसे वे पहले ही अर्जित कर चुके हैं?” उन्होंने कहा, “यही ‘आप’ सरकार का असली चेहरा है-चुनावों से पहले वादे, चुनावों के बाद प्रचार और पंजाब की जनता को भुगतान करने की बारी आने पर बहाने। सरकार वित्तीय कठिनाइयों की आड़ लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों के जायज़ बकाये से उन्हें वंचित नहीं कर सकती।” “पंजाब सरकार को अदालत के आदेशों को राजनीतिक सुझाव समझना बंद करना चाहिए। अदालत का आदेश वैकल्पिक नहीं होता। सरकार को इसका पूरी तरह, तुरंत पालन करना ही होगा।”








