राष्ट्रीय ( नितिन ) : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला के पास मशोबरा रेंज में बलदेयन के पास वन भूमि से होकर गुजरने वाली लिंक रोड पर सभी निर्माण कार्यों को तुरंत रोकने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह आदेश उन आरोपों के बाद दिया है, जिसमें इस सड़क से पूरे गांव की बजाय एक निजी घर को फायदा होने की बात कही गई है।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य के खिलाफ नागेश्वर सिंह कंवर द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। न्यायालय को बताया गया कि शिमला-मंडी राजमार्ग को बलदेयन के पास शिलथॉर्न टॉप से जोड़ने वाली लिंक रोड के निर्माण के लिए 0.0720 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन (उपयोग बदलने) के लिए 27 अप्रैल, 2026 को वन मंजूरी दी गई थी। खबरों के अनुसार, इस मंजूरी में सदहोरा गांव के लगभग 245 निवासियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से होने वाले लाभ का हवाला दिया गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने हालांकि तर्क दिया कि न्यायालय के सामने पेश की गई तस्वीरों से पता चलता है कि 144 मीटर लंबी यह सड़क मुख्य रूप से मुख्य सड़क को प्रतिवादी (एक निजी व्यक्ति) के घर से जोड़ती है, न कि पूरे गांव तक पहुंच प्रदान करती है। याचिकाकर्ता ने निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान को उजागर करने के लिए भी तस्वीरों का सहारा लिया।
याचिकाकर्ता ने लगाया ये आरोप
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि वन मंजूरी सदहोरा गांव की लोकेशन के बारे में गलत आधार पर दी गई थी। उनका दावा है कि गांव पहाड़ी की चोटी पर नहीं बल्कि सड़क के नीचे स्थित है, जिससे स्वीकृत सड़क के रास्ते के औचित्य पर सवाल उठता है। यह मामला उसी याचिकाकर्ता द्वारा 2026 में दायर एक पिछली पीआईएल से भी जुड़ा है, जिसकी सुनवाई 15 सितंबर को होनी है। न्यायालय ने पिछली याचिका में 11 मई को पारित आदेश का संज्ञान लिया, जिसके तहत वैध मंजूरी के अभाव में निर्माण मशीनरी की तैनाती पर रोक लगा दी गई थी। पीठ ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक सड़क पर सभी निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोक दिए जाएं।







