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बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: एनडीए के 9, राजद के 1 प्रत्याशी मैदान में उतरे, 10वीं सीट पर फंसा है पेच

On: June 9, 2026 4:52 AM
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बिहार विधान परिषद यानी एमएलसी की खाली सीटों के लिए नामांकन के अंतिम दिन सोमवार यानी 8 जून को राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रही। जहां बिहार विधानसभा परिसर में दिनभर नेताओं और समर्थकों की आवाजाही बनी रही। वहीं, सत्तारूढ़ एनडीए के 9 प्रत्याशियों ने अपना-अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। जबकि, मुख्य विपक्षी महागठबंधन की ओर से राजद के प्रत्याशी डॉ.सुनील कुमार सिंह ने अपना पर्चा दाखिल किया है। एनडीए के प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के अलावा नमो सरकार के केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान, केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जद(यू.) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा सहित कई मंत्री, सांसद व विधायक आदि मौजूद रहे।जद(यू.) की ओर से बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, शिवरानी देवी प्रजापति, भारती मेहता और उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद ने नामांकन पत्र दाखिल किया। हालांकि, इस दौरान निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं रहे। वह बिहार के दौरे पर निकले हुए थे। भाजपा ने भोजपुरी फिल्म अभिनेता से नेता बने पवन सिंह के अलावा संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर व शीला पंडित को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, लोजपा (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को प्रत्याशी बनाया हैं। 243 सदस्यीय 18वीं बिहार विधानसभा में वर्तमान में 242 विधायक हैं और सभी मतदान के पात्र होंगे। बिहार विधान परिषद के चुनाव में एक प्रत्याशी की जीत के लिए लगभग 24.2 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। बिहार विधानसभा में एनडीए की मौजूदा संख्या 202 को देखते हुए गठबंधन के 8 प्रत्याशियों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।दूसरी ओर महागठबंधन के पास भी अपने एक प्रत्याशी को विजयी बनाने लायक पर्याप्त संख्या बल है। क्योंकि, महागठबंधन के पास 35 विधायक है। इसमें राजद के 25 विधायक शामिल हैं। ऐसे में 9 सीटों का परिणाम लगभग स्पष्ट दिखाई देता है। सबसे दिलचस्प मुकाबला 10वीं सीट को लेकर है। इस सीट पर जीत के लिए एनडीए को अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। इसके लिए या तो महागठबंधन के विधायकों का क्रॉस वोटिंग करना जरूरी होगा या फिर विपक्ष के कुछ विधायक मतदान से अनुपस्थित रहें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संख्या बल के आधार पर बिना विपक्षी खेमे में बड़ी टूट के एनडीए के लिए 10वीं सीट हासिल करना आसान नहीं होगा। हालांकि, चुनावी राजनीति में अंतिम समय तक समीकरण बदलने की संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया जा सकता है।10वीं सीट को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है। क्योंकि, हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया था। उस चुनाव में महागठबंधन के 4 विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए थे, जिनमें कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक थे। इसका लाभ एनडीए को मिला और उसका 5वां प्रत्याशी जीतने में सफल रहा। हालांकि, बिहार विधान परिषद चुनाव की स्थिति कुछ अलग है। यहां अतिरिक्त सीट जीतने के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में केवल कुछ विधायकों की अनुपस्थिति से काम नहीं चलेगा। बल्कि, विपक्षी खेमे में बड़ी राजनीतिक टूट या व्यापक क्रॉस वोटिंग की स्थिति बनने पर ही एनडीए 10वीं सीट पर दावा मजबूत कर सकेगा। बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजर मतदान और मतगणना पर है। मौजूदा अंकगणित के मुताबिक, 8 सीटें एनडीए और 1 सीट महागठबंधन के खाते में जाती दिख रही हैं। असली लड़ाई 10वीं सीट पर होगी, जहां संख्या बल से ज्यादा राजनीतिक प्रबंधन और दलों की एकजुटता की परीक्षा होगी। अब देखना है कि 10वीं सीट किस गठबंधन के खाते में जाती है। यह तो वक्त आने पर ही पता चल सकता है।बता दें कि, 9 सीटें 28 जून 2026 से रिक्त हो रही हैं। वहीं, उपचुनाव वाली नीतीश कुमार की सीट 30 मार्च 2026 के प्रभाव से रिक्त हो रही और इसका कार्यकाल 6 मई 2030 तक है। बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें एक सीट पर उपचुनाव भी शामिल है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून 2026 है, जो समाप्त हो चुकी है। यदि आवश्यकता पड़ी तो 18 जून 2026 को मतदान होना तय है।

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