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बिहार में शराबबंदी को लेकर मंत्री ने दिया बड़ा बयान बोले शराब माफियाओं और शराब प्रेमी कर रहे कोशिश प्रतिबंध हटाने की उम्मीद

On: August 12, 2026 4:11 PM
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राष्ट्रीय : नितिन : बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने राज्य में लागू शराबबंदी कानून की समीक्षा की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि शराबबंदी हटाने की मुहिम ”शराब माफिया” और कुछ ”शराब प्रेमियों” द्वारा चलाई जा रही है। जायसवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मुहिम को शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी हवा दे रहे हैं। शराब माफिया और कुछ शराब प्रेमी राज्य में शराबबंदी हटवाने के लिए बहुत बेचैन हैं।

प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जायसवाल से केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हालिया मांग के बारे में पूछा गया था। मांझी ने बिहार में शराबबंदी कानून को गुजरात मॉडल की तर्ज पर लागू करने की बात कही थी। जायसवाल से राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) के हालिया शोध पत्र के बारे में भी सवाल किया गया। इसमें कहा गया है कि शराबबंदी के कारण राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय कमी आई है और प्रतिबंध हटाने से बिहार के राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। 

जायसवाल ने शराबबंदी का विरोध करने वाले व्यक्तियों और संगठनों से शराब सेवन के ”दुष्प्रभावों” के बारे में जागरुकता पैदा करने पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ”सिर्फ राजस्व कमाने के लिए शराबबंदी हटाने का कोई सवाल ही नहीं है। क्या कोई व्यक्ति सिर्फ पैसा कमाने के लिए वेश्यालय जाएगा?” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राजस्व से जुड़े विचार शराबबंदी के सामाजिक लाभों पर हावी नहीं हो सकते। 

जायसवाल ने कहा, ”तीन तरह की रिपोर्ट की चर्चा हो रही है। पहली रिपोर्ट कहती है कि शराबबंदी कानून के कारण राज्य में नशीली दवाओं की लत बढ़ गई है। देश में बिहार की स्थिति शायद 16वें या 17वें स्थान पर है या इससे भी नीचे है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम में करीब पांच से छह प्रतिशत आबादी नशीली दवाओं की आदी है, जबकि बिहार में यह एक प्रतिशत से भी कम है।” राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) भी पहले ही कह चुका है कि शराबबंदी कानून ने बिहार के मानव विकास सूचकांकों में विभिन्न स्तरों पर सुधार किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेताओं ने भी इसकी सराहना की है। 

जद(यू) के वरिष्ठ नेता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने मंगलवार को कहा था, ”हमारे नेता नीतीश कुमार के कार्यकाल में लागू किए गए शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि शराबबंदी कानून से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। इतना ही नहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य में लागू किए गए शराबबंदी कानून की प्रधानमंत्री मोदी ने भी सराहना की थी।

मांझी ने हाल में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में खामियों को उजागर करते हुए कहा था कि इस संबंध में कानून को गुजरात मॉडल की तर्ज पर सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए। एनसीएईआर के हालिया शोध पत्र के अनुसार, शराबबंदी के कारण राज्य के राजकोष को काफी राजस्व नुकसान हुआ है और प्रतिबंध हटाने से राज्य के राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। ‘मैक्रो पर्सपेक्टिव ऑफ बिहार्स डेवलपमेंट अचीवमेंट्स: अनफिनिश्ड एजेंडा एंड द वे फॉरवर्ड’ शीर्षक वाले इस शोध पत्र को पिछले सप्ताह इंडिया पॉलिसी फोरम के दौरान जारी किया गया था। इसमें कहा गया है कि बिहार में शराबबंदी कानून के कारण ”शराब के कारोबार, अवैध शराब की बिक्री और वैकल्पिक नशीले पदार्थों के अधिक सेवन में वृद्धि” हुई है। 

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