पंजाब नितिन : पंजाब भाजपा महासचिव परमिंद्र बराड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने के लक्ष्य पर कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या खत्म करने के लिए केवल तस्करों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे की सप्लाई चेन तोड़ने, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई करने और नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के पुनर्वास पर भी ध्यान देना होगा।
परमिंद्र बराड़ के मुताबिक, नशे की सप्लाई चेन के कारण ही नशीले पदार्थ गांवों, स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंच रहे हैं। इसलिए सबसे पहले सप्लाई नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। इसके बाद नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क और उनके वित्तीय सिंडिकेट पर कार्रवाई करनी होगी।
बराड़ ने कहा कि नशा तस्करी के मामलों में NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई के साथ-साथ PIT-NDPS एक्ट के प्रावधानों का भी प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ताकि ताकि असली गुनाहगारों की जमानत न हो सके। उसके बाद डी एडीक्शन सैंटरों को एक्सटैंड करना। उसके बाद नशे की चपेट में आए युवकों के परिजन भी बहुत परेशान हैं, उनकी मैंटल हैल्थ को मजबूत करने के लिए काफी कुछ करना होगा। इस सबके लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर सैट करना पडे़गा।
बराड़ ने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावित युवाओं के परिवार भी मानसिक और आर्थिक परेशानियों से गुजरते हैं। ऐसे में नशामुक्ति केंद्रों का विस्तार करने के साथ परिवारों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध करवाना भी जरूरी है। इसके लिए सरकार को आवश्यक बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों से बाहर आने वाले युवाओं को दोबारा नशे की गिरफ्त में जाने से बचाने के लिए रोजगारपरक कौशल, शिक्षा और खेल गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। ताकि वे नशे की दलदल में दोबारा न फंसे।
उन्होंने कहा कि नशा पकड़ना एक कार्रवाई है, लेकिन नशे की चपेट में आ चुके युवकों को नशे से बाहर निकालना असल लक्ष्य है। जो घर उजड़े हैं, उन घरों में दोबारा खुशहाल करना अमित शाह का मकसद है। 31 दिसंबर 2029 तक न तो पंजाब में कोई नशा तस्कर रहेगा, न चिट्टा रहेगा और न ही कोई चिट्टे का व्यापारी रहेगा।







