अमेठी : नीट परीक्षा में गड़बड़ियों एवं पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर अमेठी के सांसद माननीय किशोरी लाल शर्मा ने जिला कांग्रेस कमेटी, अमेठी के राजीव गांधी सभागार, गौरीगंज में आयोजित प्रेस-वार्ता के माध्यम से पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2018, 2021, 2022, 2024 एवं 2026 में नीट परीक्षा में गड़बड़ियां एवं पेपर लीक हुए। इसके पूर्व वर्ष 2015 में एआईपीएमटी (वर्तमान में नीट) का भी पेपर लीक हो चुका है। देश में युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ लगातार हो रही इस गंभीर स्थिति के बावजूद केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया।
विगत 3 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा, जिसमें 22 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे, उसमें बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश में सामने आईं। बढ़ते जनदबाव के बाद केंद्र सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी तथा दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली नीट परीक्षा के अलावा सीबीएसई की उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों तथा उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती परीक्षा, यूपी एसआई भर्ती परीक्षा, पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा, एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा सहित अनेक प्रतियोगी परीक्षाएं भी पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हुआ है। कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार आवाज उठाने और सड़कों पर संघर्ष करने के परिणामस्वरूप सरकार को नीट परीक्षा पुनः कराने का निर्णय लेना पड़ा।
नीट पेपर लीक से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 12 छात्र-छात्राएं अपनी जान गंवा चुके हैं। कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि सरकार-प्रेरित मृत्यु मानती है। उन्होंने राजस्थान के प्रदीप मेघवाल, दिल्ली की अंशिका पाण्डेय, उत्तर प्रदेश के रितिक मिश्रा एवं शिवानी यादव, गोवा के सिद्धार्थ हेगड़े, कर्नाटक की भाग्यश्री, मध्य प्रदेश की आकांक्षा चतुर्वेदी, राजस्थान के उमेश माली एवं रेणु मीणा, उत्तराखंड की रिया कुमारी थापा, तमिलनाडु की अनुकीर्तना तथा गुजरात के कहान पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विद्यार्थियों ने मानसिक तनाव के चलते अपनी जान गंवाई।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रश्नपत्र छपने के बाद बिचौलियों के माध्यम से परीक्षा से पहले ही बड़ी संख्या में प्रश्नपत्र बेचे जाते हैं। जांच में कुछ छात्रों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने लीक प्रश्नपत्र प्राप्त करने के लिए 25 हजार रुपये से लेकर 40 लाख रुपये तक का भुगतान किया।
पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, अर्थात लगभग हर वर्ष दो राष्ट्रीय परीक्षाएं पेपर लीक की शिकार हुई हैं। इसके बावजूद दोषियों को सजा मिलने के मामले बेहद कम हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों, अभिभावकों की पीड़ा और लगातार सामने आ रही घटनाओं से आहत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक सुधार के उद्देश्य से छात्रों से सीधे संवाद स्थापित करने के लिए “छात्रों की गूंज” अभियान की शुरुआत कोटा महारैली से की है।










