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तस्वीरों ने खोली पोल: मऊरानीपुर में ‘डिजिटल इंडिया’ की कीचड़दार हकीकत, तड़पते मरीज और बेबस बचपन से कब तक मुंह मोड़ेगी सरकार?

On: August 23, 2026 11:40 AM
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झांसी (हरिमोहन श्रीवास) : शासन और प्रशासन के ‘स्मार्ट विलेज’ और ‘चहुंमुखी विकास’ के दावों के सीने पर मऊरानीपुर विधानसभा से वायरल हुई तीन तस्वीरें एक ऐसा गहरा जख्म दे रही हैं, जिसका जवाब न तो स्थानीय विधायिका रश्मि आर्य के पास है और ना ही विकास का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार के पास। ये तस्वीरें महज कोई आम दृश्य नहीं हैं, बल्कि यह लोकतंत्र में बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती ग्रामीण जनता की बेबसी का चीखता हुआ दस्तावेज हैं।

कीचड़ में डूब गया सरकारी सिस्टम, चारपाई ही बनी ग्रामीणों की ‘जीवनदायिनी’
पहली तस्वीर मऊरानीपुर के जलालपुरा गांव की है, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप जाए। चमचमाती फोरलेन सड़कों और एक्सप्रेसवे का दावा करने वाले हुक्मरानों को इस गांव का कीचड़ भरा रास्ता देखना चाहिए, जहां एक लाचार बीमार व्यक्ति को एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुई। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि कैसे दो युवक कीचड़ और मलबे के बीच एक चारपाई पर लदे मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। क्या इसी दिन के लिए जनता टैक्स देती है कि जब उसकी जान आफत में हो, तो उसे आधुनिक एम्बुलेंस के बजाय आदिम युग की तरह खाट पर ढोया जाए? गांव में सीसी रोड और डामर का बजट डकारने वाले भ्रष्टाचारियों पर सरकार की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

पढ़ने की उम्र में बच्चे गड्ढे से गाड़ी ढकेल रहे मासूम, वैन फंसी तो बच्चों ने लगाया दम
दूसरी तस्वीर विकास के दावों के मुंह पर एक और करारा तमाचा है। फूलपुर गांव में स्कूल की वैन सड़क पर बने किसी तालाब जैसे गड्ढे में आकंठ डूब गई। ‘बढ़ेगा इंडिया’ का नारा देने वाले नीति-निर्माताओं को शर्म आनी चाहिए कि जिन बच्चों के हाथों में आज किताबें और देश का भविष्य होना चाहिए था, वे बच्चे घुटने तक कीचड़ में सने पैरों के साथ उस वैन को धक्का लगाने पर मजबूर हैं। सड़कों की इस खस्ताहाली ने यह साफ कर दिया है कि मऊरानीपुर विधानसभा का ग्रामीण नेतृत्व विकास के नाम पर सिर्फ चुनावी वादों की मलाई खा रहा है, जबकि आम जनता का बचपन और भविष्य गड्ढों में हिचकोले खा रहा है।

गौ-भक्ति के नाम पर सिर्फ वोटबैंक की राजनीति? मृत गाय को ट्रैक्टर से घसीटकर किया कलंकित
तीसरी और सबसे शर्मनाक तस्वीर टहरौली के रमपुरा से आई है, जिसने सरकार के कथित ‘गौ-प्रेम’ की कलई पूरी तरह खोल दी है। जिस गाय को सनातन संस्कृति में माता का दर्जा देकर वोट बटोरे जाते हैं, उसी गाय की मृत्यु के बाद उसके शव के साथ अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। वायरल फोटो में साफ देखा जा सकता है कि मृत गाय के पैर में रस्सी बांधकर ट्रैक्टर के पीछे पत्थरों और कीचड़ पर क्रूरता से घसीटा जा रहा है। क्या गौशालाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट डकारने वाले अधिकारियों को गाय को सम्मानजनक विदाई देना भी गवारा नहीं? इस घोर पाप पर राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अड़जरिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल नहीं भेजा गया, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विधायिका की चुप्पी और सरकार की नाकामी पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो चीख चीख कर गवाही दे रहे हैं कि मऊरानीपुर में विकास सिर्फ विज्ञापनों और होर्डिंग्स तक सीमित है। जनता का सवाल है कि क्षेत्र की विधायिका रश्मि आर्य जो दिन-रात क्षेत्र के कायाकल्प का दावा करती हैं, क्या उन्हें अपने क्षेत्र की यह बदहाली दिखाई नहीं देती? जब तक ग्रामीण इलाकों में एम्बुलेंस नहीं पहुंचेगी, बच्चों को गड्ढे ढकेलने पड़ेंगे और गौमाता की इस तरह बेअदबी होगी, तब तक सरकार का हर दावा खोखला और बेमानी साबित होता रहेगा।

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