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Nepal Flood : मौत को मात देकर मलबे से ‘योद्धा’ की तरह निकलीं 97 साल की बुजुर्ग महिला, नेपाल बाढ़ त्रासदी में बनीं उम्मीद की नई किरण

On: August 29, 2026 11:27 PM
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राष्ट्रीय ( नितिन ) : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भीषण तबाही के बीच से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया में इंसान के हौसले और उम्मीद की एक नई मिसाल पेश की है। बाढ़ के मलबे के नीचे दबीं 97 वर्षीय बुजुर्ग महिला गुना माया बोहरा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। वे इस भीषण प्राकृतिक आपदा में जीवन की जीत का सबसे बड़ा चेहरा बन चुकी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में गुना माया को एक एक्स्कवेटर (मलबे हटाने वाली मशीन) के बकेट (लोहे के पंजे) में सुरक्षित बैठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। उनके मिट्टी से सने कपड़े और थका हुआ चेहरा बाढ़ की भयानक तबाही की कहानी बयां कर रहा है।

4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बची जान

बाढ़ के तेज बहाव के कारण जिस केयर होम (वृद्धाश्रम) में गुना माया रह रही थीं, वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया और वह उसी मलबे के नीचे दब गईं। नेपाल सेना और स्थानीय पुलिस ने करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। काठमांडू से उनके बचाव के लिए पहुंचे उनके पर-भतीजे (ग्रेट-नेफ्यू) दीपक बोहरा ने बताया कि जब दादी मलबे से बाहर आईं, तो वे किसी युद्ध को जीतकर लौटे एक “योद्धा” की तरह लग रही थीं। उन्होंने बताया कि आपदा स्थल पर अभी भी कई अन्य लोगों के दबे होने और मारे जाने की आशंका है। फिलहाल गुना माया को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वे तेजी से ठीक हो रही हैं।

नेपाल में जल-प्रलय: 670 से अधिक की मौत, 300 से ज्यादा भारतीय लापता

गौरतलब है कि बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में ग्लेशियर टूटने (ग्लेशियर कोलैप्स) के कारण भोटे कोशी नदी में अचानक भयानक बाढ़ आ गई। इस जल-प्रलय में अब तक कम से कम 676 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 300 से अधिक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

इस बीच, नेपाल के मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में और तेज बारिश व गरज के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी जारी की है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में रुकावट आ सकती है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के मुताबिक, इस भीषण तबाही के बाद देश को दोबारा खड़ा करने और पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ेगी, जो नेपाल की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग दसवां हिस्सा है।

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