पंजाब के सिख मंत्री और विधायक आज अमृतसर में अकाल तख्त साहिब के आगे पेश होंगे अकाल तख्त ने इन सभी से आप सरकार पर बेदबी कानून के खिलाफ बनाए गए कानून जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट 2026 पर जवाब मांगा है। सीएम मान कह चुके हैं कि विधानसभा के स्पीकर कुलतर सांडवा के साथ सभी सिख विधायक वह मंत्री लिखित जवाब कल तक में दे देंगे कांग्रेस अकाली दल और निर्दलीय मंत्री भी यहाँ पेश होकर कानून पर जवाब देंगे यह सभी सुबह 11:00 से 11:30 बजे पहुंचेंगे।

सिख मंत्रियों विधायकों की पेशी क्यों हो रही है आईए जानते हैं पूरा मामला
अकाल तख्त ने सरकार के नए कानून पर एतराज जताया है अकल तख्त का कहना है कि कानून बनाने से पहले सरकार ने सिख धार्मिक संस्थाओं और अकाल तख़्त से औपचारिक सलाह नहीं ली।अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गढ़गज ने कहा कि सरकार ने अकाल तख़्त के पहले दिए गए निर्देशों की अनदेखी करी उनका यह भी कहना है कि गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े धार्मिक मामलों में अंतिम मार्गदर्शन बंद और धार्मिक संस्थाओं का होना चाहिए इसलिए सरकार को आपत्तिजनक प्रावधानों पर पुनर्विचार करना चाहिए अकाल तख़्त में सिख मंत्रियों और विधायकों से पूछा है कि कर्मियों के बावजूद उन्होंने इस कानून का समर्थन किन आधारों पर किया और इस पर उनका क्या पक्ष है।

सरकार का कानून को लेकर क्या तर्क है
सीएम भगवत सिंह मान का कहना है कि यह संगत की ही मांग थी कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाए इसी वजह से उम्र कैद और 50 लाख तक जुर्माने वाला कानून बनाया गया। मान रविवार को फरीदकोट मे कहा की अकाली दल एंटीबायोटिक कानून का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि उसे अपने पुराने कर्मों का जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया की अपील में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मे साजिश रचने वाली ताकतों के साथ अकाली नेताओं की मिला भक्ती रही है अब उन्हें गलतियों की जवाबदेही से बचने के लिए वह इस कानून का विरोध कर रहे हैं मान ने कहा कि विरोध के बावजूद उनकी सरकार लोगों के हित में यह कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस पेशी के बाद क्या होगा अकाल तख्त में सिख मंत्री और विधायकों का पक्ष सुना जाएगा जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर अकाल तख़्त आगे कोई निर्देश या फैसला सुना सकता है यदि कानून की धारों पर आपत्तियां बरकरार रही तो सरकार पर संशोधन का दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने संशोधन नहीं किया तो फिर आपके खिलाफ सिख विरोधी माहौल बनाने की कोशिश हो सकती है।कुल मिलाकर इस घटनाक्रम का असर एंटी कानून के भविष्य के साथ-साथ पंजाब के सियासत और सिख धार्मिक राजनीति पर भी पड़ सकता है।











