महाराष्ट्र सरकार द्वारा 70 वर्ष पुराने “नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956” को निरस्त करने के निर्णय पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार को सिख कौम के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिनसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों। जो किसी के हित में नहीं हैं। राजनीति और धर्म दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल मुझे धार्मिक रूप से बदनाम कर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, जबकि मैं केवल रोजगार, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास जैसे मुद्दों पर लोगों के हित में कार्य कर रहा हूं।”
इसीलिए उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य राज्य के राजनीतिक लोगों को पंजाब के सिख समुदाय के कानून के बीच में कुछ भी नहीं कहना चाहिए वहीं उन्होंने अकाल तख्त साहिब के द्वारा सुनाये गए फैसले का सम्मान करते हुए यह माना कि आने वाली 29 तारीख को उनके सभी विधायक और मंत्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में पेश होंगे और उनके फैसले का सम्मान करते हुए उनके निर्देश मानेंगे








