पंजाब के मंडी गोविंदगढ़ के दो भाइयों ने मिलकर करोड रुपए की ठगी की थी शातिर भाइयों ने 27 फर्जी कंपनियां खड़ी करके 25 बैंक खातों से 3089 करोड रुपए निकालिए यही नहीं आरोपियों ने इस ठगी के जरिए सरकार को 108.49 करोड रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट का चुना भी लगाया है। आरोपियों ने एपीएमसी बैंक के खातों से 3089 करोड रुपए नगद निकाले क्योंकि इन खातों में रोजाना करोड़ों का लेनदेन होता है ज्यादातर निकासी नगद में ही होती है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट एड और डायरेक्टरी जनरल ऑफ़ गुड्स एंड सर्विस इंटेलिजेंस दिग्गी ने खुफिया जानकारी निकाली। दोनों भाइयों अमित कुमार, मनीष कुमार का रिकॉर्ड खंगाल दोनों भाइयों ने मंडी गोविंदगढ़ के ही एक अन्य कारोबारी गौरव अग्रवाल के साथ हाथ मिलाया और बिना एक भी ग्राम माल की डिलीवरी किये बगैर सिर्फ कागजों पर हजारों करोड़ का टर्नओवर खड़ा कर दिया।आपको बता दें दिग्गी ने दोनों भाइयों को 2024 में गिरफ्तार भी किया लेकिन इस मामले की डिटेल सामने नहीं आई दिग्गी ने अब इस मामले में दोनों भाइयों समेत पांच लोगों पर बायनेम और बाकी अज्ञात लोगों पर लुधियाना के थाना जमालपुर में एफआईआर दर्ज करवाई है और पुलिस को दी शिकायत में इस घोटाले की पूरी कहानी सामने आई।
घोटाले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई।
लुधियाना पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार दिग्गी को खुफिया तंत्र से एक्सपोर्ट की जानकारी मिली दोनों भाई लगभग 9 महीने जेल में भी रहे इसके बाद दोनों आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को नियमित जमानत पर रिहा किया कारण बताओं नोटिस भी जारी किया गया। शिकायत के अनुसार दिग्गी लुधियाना ने 21 फरवरी 2025 को आरोपियों और उनके उनके प्रमुख को एक विस्तृत कारण बताओं नोटिस जारी कर रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी वही ईडी के सामने कबूला अपना गुनाह और ईडी के अफसरों का दावा है कि अमित कुमार गोयल ने स्वीकार किया कि वह साल 2018 से एक सक्रिय एंटी ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे जो बिना माल की सप्लाई किये सिर्फ बिल बेचता था और कमीशन काटकर नगदी वापस करता था। इसी के साथ जमालपुर थाने में ताजा एफईआर हुई दर्ज जिसमें ईडी के सहायक निर्देशक सूरज कुमार यादव ने लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को इस मामले में एक शिकायत दी पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा थाना जमालपुर पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश देते हुए एफईआर में धारा 120द, 420, 467, 468 और 471 जैसी संगीन धाराओं में कार्रवाई करने की बात कही फिर एफईआर में अमित कुमार गोयल मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह और बलवंत सिंह के नाम शामिल किए गए हैं।

छापेमारी में फर्जी निकले रिकॉर्ड में दर्ज पते लुधियाना जोनल यूनिट ने जब कागजों में दर्ज कंपनियों के पतो पर छापेमारी की तो वहां जमीन पर कोई गोदाम या ऑफिस नहीं मिला। इसके बाद पुख्ता डिजिटल और फिजिकल सबूत की बारमदगी की गयी। दिग्गी ने फिर मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी करके सर्च ऑपरेशन चलाया सर्च के दौरान जांच एजेंसियों को घोटाले पर मोहर लगाने वाले पुख्ता सबूत मिले अफसर को 54 चेक बुक 46 एटीएम 11 पैन कार्ड वह 5 वोटर कार्ड मिले इसी के साथ व्हाट्सएप चैट और डिलीट डाटा रिकवरी में अफसर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि डिजिटल डिवाइसेज के बैकअप और डिलीट किए गए डाटा को जब रिकवर किया गया तो उसमें करोड़ों रुपए के फर्जी इनवॉइस और व्हाट्सएप चैट मिले।
फर्जी बिल्डिंग के जरिए एक करोड़ कमाने कि मोटा ऑपरेंडी जरूरतमंदों के केवाईसी दस्तावेजों का दुरूपयोग सामने आया। शिकायत में बताया कि दोनों भाई किस तरीके से फर्जी कंपनियां बना रहे थे उन्होंने बताया कि अमित गोयल और मनीष कुमार अधिक रूप से कमजोर और गरीब लोगों को निशाना बनाते थे मामूली पैसों का लालच देकर यह नौकरी लगने के नाम पर उनका पैन कार्ड आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज केवाईसी हासिल कर लेते थे। अमित गोयल ने 25 कंपनियां इन लोगों के नाम पर दर्ज कर दी इसी के साथ 720 करोड़ के फर्जी बिल भी जारी किये हैं। कागजों पर खड़ी की गई इन 27 सेल कंपनियों के जरिए देश के कई अन्य बड़ी लाभार्थी कंपनियों को फर्जी इनवॉइस यानी बिना माल की डिलीवरी के सिर्फ बिल जारी किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट की चोरी भी की गई। शिकायत के अनुसार बिना माल खरीदें जो फर्जी बिल लाभार्थी कंपनियों को दिए गए थे उनके आधार पर उन कंपनियों ने सरकार से 108.49 करोड रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर लिया जो टैक्स सरकारी खजाने में जाना चाहिए था। वह इन कंपनियों ने आपस में बांट लिया आरटीजीएस के जरिए लेयरिंग और एपीएमसी खातों का खेल करते थे। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने यह दिखाने के लिए की व्यापार पूरी तरह कानूनी है लाभार्थी कंपनियां इन 27 फ़र्ज़ी कंपनियों के बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पैसा ट्रांसफर करती थी इस पैसो को सीधा निकालने के बजाय इसे अलग-अलग बैंक खातों में लेयरिंग में घुमाया जाता था लास्ट में यह सारा पैसा एपीएमसी कृषि उद्योग कृषि उत्पाद बाजार समिति के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था सिंडिकेट ने इसके लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की विभिन्न शाखों में 25 एपीएमसी खाता खोल रखे थे।

दिग्गी और ईडी के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा मामले की जांच करने वाले थाना जमालपुर के प्रभारी गुरमीत सिंह ने बताया कि ईडी की तरफ से पुलिस कमिश्नर को शिकायत मिली थी शिकायत में जिनके नाम से ठगी हुई है उनमें से कुछ एड्रेस जमालपुर थाने के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के भी हैं इसलिए एफईआर दर्ज कर ली है और अब इसके आगे की कार्रवाई की जा रही है।










