चंडीगढ़ नितिन : इस बार दिवाली सिर्फ रोशनी और खुशियों का त्योहार ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी खास मानी जा रही है। 8 नवंबर को दिवाली के दिन ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के चलते महालक्ष्मी जयंती योग बनने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों का दावा है कि ऐसा संयोग करीब पांच दशक बाद देखने को मिल रहा है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना को विशेष फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार दिवाली रविवार को पड़ रही है। स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग और तुला राशि में चंद्रमा की मौजूदगी के साथ आधी रात को अमावस्या तिथि का होना इस विशेष संयोग को और महत्वपूर्ण बना रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और आर्थिक खुशहाली की कामना की जाती है।
दिवाली की रात पूजा का विशेष महत्व
इस साल अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। ऐसे में दिवाली की रात अमावस्या रहने के कारण लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व बताया जा रहा है।
धनतेरस पर कब न करें खरीदारी?
दिवाली से पहले 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी। इस दिन बाजारों में सोने-चांदी के आभूषणों और बर्तनों की खरीदारी को लेकर रौनक रहेगी। पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में खरीदारी करने से बचना चाहिए।
शाम के समय पूजा का शुभ अवसर
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। चंडीगढ़ में इस दिन सूर्यास्त शाम 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। सूर्यास्त के आसपास 45 मिनट का समय पूजा के लिए अनुकूल रहेगा।












