छत्तीसगढ़ के भिलाई में 15 हजार रुपए की जूस बेचने की नौकरी से 94,400 करोड़ के साम्राज्य तक, ऐसे बना महादेव ऐप का किंग

On: November 3, 2026 9:06 AM
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नेशनल नितिन : छत्तीसगढ़ के भिलाई की एक छोटी सी जूस की दुकान से शुरू हुआ सफर भारत के सबसे बड़े सट्टेबाजी नेटवर्क के खुलासे पर जाकर रुका है। महीने में 15,000 रुपये कमाने वाले सौरव चंद्राकर ने दुबई में बैठकर ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ नाम का एक विशाल सट्टेबाजी साम्राज्य खड़ा कर दिया। इस नेटवर्क के पास हजारों एजेंट, विदेशी बैंक खाते और अरबों की संपत्तियां थीं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे सिंडिकेट ने 94,400 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुमानों के मुताबिक ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ ऐप और उसकी सहयोगी सट्टेबाजी वेबसाइटों के जरिए एक दशक के भीतर करीब 94,400 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया। कभी भिलाई की सड़कों पर जूस बेचने वाला चंद्राकर देखते ही देखते UAE में 200 करोड़ रुपये का शाही विवाह आयोजित करने और प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश वानुआतू की नागरिकता हासिल करने तक पहुंच गया। उसका यह पूरा घटनाक्रम किसी सिनेमा की पटकथा जैसा नजर आता है।

रविवार, 1 नवंबर को  CBI द्वारा ओमान से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद सौरव चंद्राकर का भिलाई से दुबई तक का सफर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। महादेव ऐप सिंडिकेट का यह मुख्य आरोपी CBI के दो मामलों और ED की मनी-लॉन्ड्रिंग जांच में लंबे समय से वांछित था। ओमान की रॉयल पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी कर भारत वापस लाया गया है।

भिलाई में चंद्राकर अपने परिवार के जूस व्यापार की देखभाल करता था। वहीं उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई, जो बाद में उसके इस पूरे सट्टेबाजी नेटवर्क में बराबर का साझीदार बना। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों ने मिलकर भारत और खाड़ी देशों तक फैला एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया। पैसे के हस्तांतरण के लिए उन्होंने दूसरों के नाम पर खोले गए फर्जी बैंक खातों (‘म्यूल’ अकाउंट्स) और हवाला के अवैध माध्यमों का इस्तेमाल किया। आगे चलकर उसकी बेहद खर्चीली जीवनशैली ही जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गई।

200 करोड़ रुपये का भव्य शादी समारोह

UAE में हुआ 200 करोड़ रुपये का भव्य शादी समारोह- जिसमें बॉलीवुड और संगीत जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया था और दुबई के महंगे इलाकों में खरीदे गए आलीशान बंगले, जांच अधिकारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुराग साबित हुए।

सौरव चंद्राकर का बचपन

सौरव चंद्राकर का बचपन छत्तीसगढ़ के भिलाई में बीता। उसके पिता नगर निगम में क्लर्क थे, जिन्होंने बाद में समय से पहले सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी, जबकि उसकी मां गृहणी थीं। जानकारियों के अनुसार, उनका परिवार ‘ऑर्बिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी के जरिए ‘जूस फैक्ट्री’ नाम की दुकान चलाता था। इस कंपनी में सौरव के बड़े भाई गीतेश की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। चंद्राकर इसी दुकान पर काम करता था और उसे हर महीने 15,000 रुपये वेतन मिलता था।

दिसंबर 2020 तक वह जूस दुकान की कमाई से ही अपना एक छोटा-मोटा स्थानीय कारोबार चला रहा था। इसी दौरान रवि उप्पल का उस दुकान पर लगातार आना-जाना रहता था, जो बाद में सट्टेबाजी नेटवर्क में उसका मुख्य सहयोगी बना। इसके बाद चंद्राकर और उप्पल ने मिलकर ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ नाम से एक बड़ा ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म तैयार किया। ED के दस्तावेजों के मुताबिक, चंद्राकर 16 फरवरी 2022 को भारत छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात चला गया और वहीं स्थायी रूप से रहने लगा।

कैसे चलता था सट्टेबाजी नेटवर्क का खेल

यह सट्टेबाजी नेटवर्क किस तरह संचालित होता था, इसे समझना बेहद जरूरी है। पूरे नेटवर्क की मुख्य कमान दुबई स्थित केंद्रीय मुख्यालय से संभाली जाती थी, जबकि भारत के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय एजेंट सट्टेबाजी के अलग-अलग ‘पैनल’ का संचालन करते थे। ED के अनुसार, यह सिंडिकेट अपने सहयोगियों को सट्टेबाजी पैनल की फ्रेंचाइजी देता था, जिसमें कमाई का बंटवारा 70 और 30 के अनुपात में होता था। ये स्थानीय संचालक नए ग्राहकों को जोड़ते थे, उनके सट्टेबाजी यूजर अकाउंट बनाते थे और क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश के खेल तथा अन्य गतिविधियों पर दांव लगवाने के लिए नकदी जमा करते थे।

जांचकर्ताओं ने भारत और UAE में ऐसे 3,200 से अधिक पैनलों की पहचान की है। दुबई मुख्यालय से ही सभी फ्रेंचाइजी संचालकों को लॉगिन क्रेडेंशियल्स दिए जाते थे और हर सप्ताह के अंत में लाभ और हानि का पूरा हिसाब-किताब किया जाता था। इस तरह अर्जित किया गया पैसा फर्जी बैंक खातों, बहुस्तरीय वित्तीय लेन-देन और हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेशों में बैठे मुख्य प्रमोटरों तक पहुंचा दिया जाता था।

ED की सितंबर 2026 की चार्जशीट के अनुसार, केवल मूल ‘महादेव’ प्लेटफॉर्म से ही 75,000 करोड़ से 80,000 करोड़ रुपये की कमाई की गई थी। इसके अलावा, इससे जुड़ी अन्य सहयोगी सट्टेबाजी वेबसाइटों ‘स्काईएक्सचेंज’ और ‘लोटस365’ से क्रमशः 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये और 2,400 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित करने का आरोप है। इस प्रकार ED ने कुल अवैध कारोबार का दायरा 94,400 करोड़ रुपये आंका है।

चंद्राकर की यह अकूत संपत्ति दुनिया के सामने तब आई, जब उसने फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह स्थित ‘वाल्डोर्फ एस्टोरिया’ होटल में हर्षिता के साथ विवाह किया। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि 10 से 14 फरवरी 2023 के दौरान आयोजित इस शादी समारोह में लगभग 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए थे।

इस शादी में मेहमानों को लाने-ले जाने के लिए नागपुर से तीन स्पेशल चार्टर्ड विमान किराए पर लिए गए थे। इस बेहद खर्चीले आयोजन में टाइगर श्रॉफ, सनी लियोन, नेहा कक्कड़, आतिफ असलम, राहत फतेह अली खान और विशाल ददलानी जैसे कई प्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी थीं और शिरकत की थी।

ED ने कार्यक्रम आयोजकों, लग्जरी होटलों, एयरलाइन कंपनियों और ट्रैवल एजेंसियों को किए गए नकद भुगतानों की गहन जांच की। यह शाही शादी ही इस पूरे मनी-लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में सबसे बड़ा माध्यम बनी। जांच अधिकारियों ने शादी से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं और कलाकारों को दिए गए पैसों के ब्योरे की बारीकी से पड़ताल की।

जांच के दौरान अधिकारियों को यह भी पता चला कि चंद्राकर ने 6 मई 2022 को प्रशांत महासागरीय देश वानुआतू का पासपोर्ट प्राप्त कर लिया था, जबकि उस समय उसके पास वैध भारतीय पासपोर्ट भी मौजूद था। मामला सामने आने के बाद उसका भारतीय पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था।

दुबई में चंद्राकर की कई महंगी संपत्तियों, विला और अपार्टमेंट्स 

इसके साथ ही ED ने दुबई में चंद्राकर और उसके साथियों की कई महंगी संपत्तियों, विला और अपार्टमेंट्स की पहचान की। भारत और विदेशों में स्थित लगभग 3,500 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को उनके वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर जब्त (अटैच) किया जा चुका है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां 2023 से ही चंद्राकर की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही थीं।

जून 2026 में चंद्राकर को ओमान की राजधानी मस्कट में उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह फर्जी यात्रा दस्तावेजों के जरिए वहां प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। ओमान में उसके फर्जी पासपोर्ट से जुड़े कानूनी मामलों के कारण उसके प्रत्यर्पण में कुछ समय लगा।

आखिरकार 1 नवंबर को CBI ने उसे ओमान से प्रत्यर्पित कराकर भारत लाने की पुष्टि की। इससे पहले इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में ले रखा था। अब चंद्राकर पर भारत में सट्टेबाजी नेटवर्क संचालित करने और अवैध धन को वैध बनाने (मनी-लॉन्ड्रिंग) के संगीन आरोपों में अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा। उसकी हिरासत से जांच एजेंसियों को इस सिंडिकेट के काम करने के तरीकों, विदेशों में भेजे गए पैसों के अंतिम ठिकाने और इसमें शामिल प्रभावशाली लोगों को दिए गए कथित संरक्षण भुगतानों की सच्चाई सामने लाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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