बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से मिलने कांग्रेस पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपीए की चेयरपर्सन रह चुकीं सोनिया गांधी सोमवार यानी 2 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित लालू पुत्री सांसद डॉ.मीसा भारती के आवास पर पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने लालू यादव का कुशल-क्षेम जाना। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई विपक्षी दलों की रैली को लेकर पहुंचे राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व लालू पुत्र नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव भी इस मुलाकात के दौरान मौजूद रहे। जहां सोनिया गांधी और लालू यादव की इस मुलाकात ने एक बार फिर दोनों नेताओं के करीब तीन दशक पुराने राजनीतिक रिश्ते व उनकी खास ‘केमिस्ट्री’ को चर्चा में ला दिया है। वहीं, इस मुलाकात के बाद लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ’एक्स’ पर कुछ तस्वीरें साझा की है। उन्होंने लिखा कि ’सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं। लालू यादव ने खास तौर पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौर का उल्लेख किया और उस समय बिहार के लिए किए गए कार्यों को याद किया।’ लालू यादव ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान युवाओं, किसानों, जवानों और आम आदमी के लिए पारदर्शी एवं जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गईं। उन्होंने मनरेगा, सूचना का अधिकार यानी आरटीआई और शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई जैसे कानूनों का भी उल्लेख किया।
केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री रह चुके राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने पोस्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को भी याद किया। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास के लिए उस दौरान 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दी गई। इस बहाने लालू यादव ने यूपीए के दौर में राजद और कांग्रेस के रिश्ते को भी रेखांकित किया। सोनिया गांधी और लालू यादव के बीच का राजनीतिक संबंध भारतीय राजनीति के लम्बे और स्थिर गठबंधनों में माना जाता है। करीब ढाई से तीन दशक के इस सफर में दोनों नेताओं ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। इसके बावजूद शीर्ष स्तर पर दोनों के बीच भरोसा और तालमेल बना रहा।

वैसे, बिहार में राजद और कांग्रेस के बीच समय-समय पर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद अवश्य सामने आए। कई बार दोनों दलों के नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। लेकिन, सोनिया गांधी और लालू यादव के व्यक्तिगत राजनीतिक रिश्ते पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा। दोनों के रिश्ते की मजबूती का एक उदाहरण वर्ष 1999 में देखने को मिला। जब सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर शरद पवार और पी.ए. संगमा सहित कुछ नेताओं ने कांग्रेस से अलग राह पकड़ी थी। उस दौर में लालू प्रसाद यादव उन प्रमुख नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सोनिया गांधी का खुलकर समर्थन किया था। बहुचर्चित चारा घोटाला और अन्य कानूनी मामलों के दौरान जब लालू यादव मुश्किलों में घिरे, तब भी कांग्रेस और राजद के बीच राजनीतिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए। दोनों दलों के बीच धर्मनिरपेक्षता और भाजपा विरोधी राजनीति साझा आधार बरकरार रही। लालू यादव व सोनिया गांधी के बीच राजनीतिक तालमेल की सबसे बड़ी वजहों में वैचारिक समानता भी रही है। दोनों नेताओं की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता और भाजपा विरोधी रुख महत्वपूर्ण रहा। यही वजह रही कि केंद्र की राजनीति में कांग्रेस और राजद लम्बे वक्त तक एक-दूसरे के सहयोगी बने रहे हैं।
वर्ष 2004 में यूपीए-1 सरकार बनने के बाद लालू प्रसाद यादव को पहली बार रेल मंत्री बनाया गया। डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यूपीए के प्रमुख सहयोगियों में शामिल रहे। सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन में लालू यादव की भूमिका उस दौर में काफी अहम रही। सोनिया गांधी और लालू यादव के रिश्ते में राजनीतिक आवश्यकता के साथ व्यक्तिगत सम्मान भी दिखाई देता रहा है। लालू यादव सार्वजनिक रूप से सोनिया गांधी के प्रति सम्मान जताते रहे हैं। वहीं, सोनिया गांधी ने भी बिहार की राजनीति में लालू यादव के प्रभाव और उनके जनाधार को हमेशा महत्व दिया। सोनिया गांधी का खुद लालू प्रसाद यादव से मिलने उनके आवास पर पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि, दोनों नेताओं का रिश्ता लम्बे वक्त से कांग्रेस-राजद गठजोड़ की राजनीति का अहम आधार रहा है। लालू पुत्र नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मौजूदगी में हुई इस मुलाकात ने पुरानी राजनीतिक केमिस्ट्री को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना है कि आगे क्या नया राजनीतिक गुल खिलता है। यह तो वक्त आने पर ही पता चल सकता है।










