पंजाब लुधिआना (नितिन) : महानगर में संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले सैंकड़े लोगों की मौत का रहस्य पिछले एक साल से फाइलों में दबा हुआ है। लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस की कथित लापरवाही और उदासीन रवैये के चलते सिविल अस्पताल के शवगृह में 150 से ज्यादा मृतकों के बिसरा सैंपल बिना जांच के धूल फांक रहे हैं। नियमानुसार पोस्टमार्टम के तुरंत बाद संबंधित थाना पुलिस को ये सैंपल हासिल कर खरड़ स्थित स्टेट केमिकल टेस्टिंग लेबोरेटरी भेजने होते हैं, ताकि जहर, ड्रग ओवरडोज या किसी जहरीले रसायन की पुष्टि हो सके। लेकिन पुलिस की घोर सुस्ती के कारण महीनों बीत जाने के बाद भी ये सैंपल अस्पताल से कलेक्ट ही नहीं किए गए, जिससे कई संवेदनशील आपराधिक व संदिग्ध मामलों की जांच अधर में लटक गई है।
मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद खुली नींद, सामने आई हकीकत
इस गंभीर प्रशासनिक और कानूनी विफलता का खुलासा तब हुआ जब महीनों से बिसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रहे एक मृतक के परिजनों ने पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लुधियाना पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। आयोग की फटकार के बाद जब पुलिस अधिकारी हरकत में आए और सिविल अस्पताल के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, तो पता चला कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि 150 से ज्यादा ऐसे बिसरा सैंपल हैं जिन्हें पुलिस ने कई वर्षों से उठाया ही नहीं है। इनमें से कई सैंपल तो एक साल से भी अधिक समय से अस्पताल के फ्रीजरों में बिना जांच के पड़े हैं।
अस्पताल लगातार भेजता रहा रिमाइंडर, पुलिस चौकी ने नहीं ली सुध
सिविल अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जिन मामलों में जहर, ड्रग्स की ओवरडोज या किसी अन्य प्रकार के नशे से मौत की आशंका होती है, डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के अंदरूनी अंगों (बिसरा) को सुरक्षित प्रिजर्व कर लेती है। प्रक्रिया के तहत, सिविल अस्पताल पुलिस चौकी को सूचित किया जाता है कि वह संबंधित थानों के जांच अधिकारियों से संपर्क कर सैंपल खरड़ लैब भिजवाए। अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस चौकी को कई बार लिखित रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद थानों से कोई मुलाजिम सैंपल लेने नहीं पहुंचा। अधिकारी ने बताया कि जब तक बिसरा की केमिकल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का अंतिम कारण पेंडिंग (अधूरा) ही रहता है। हालांकि अब कुछ मामलों में डॉक्टर संभावित कारण दर्ज कर रहे हैं, लेकिन हर मामले में ऐसा करना संभव नहीं है।
पुलिस का तर्क: समझौते और फोर्स की कमी बनी देरी की वजह
दूसरी ओर, लुधियाना पुलिस के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बेहद संवेदनशील और गंभीर मामलों में जांच अधिकारी जल्द से जल्द सैंपल लेकर खरड़ लैब भेजते हैं। अधिकारी ने दलील दी कि कई मामलों में शुरुआत में परिजन अस्वाभाविक मौत या हत्या का शक जताते हैं, लेकिन बाद में या तो वे कानूनी कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाते या फिर दूसरे पक्ष के साथ आपसी समझौता कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त, अधिकारी ने शहर की पुलिस व्यवस्था में कर्मचारियों और नफरी की भारी कमी का हवाला देते हुए कहा कि स्टाफ की कमी के कारण अक्सर सैंपल कलेक्ट करने और लैब तक पहुंचाने की प्रक्रिया में देरी हो जाती है।







