त्योहारों पर मिठाई खरीदने से पहले हो जाएं सावधान! मिठाइयों में डाले जाने वाले रंगों को लेकर बड़ा खुलासा

On: October 27, 2026 10:36 AM
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पंजाब (नितिन) : त्योहारों के दिनों में मिठाइयों का आदान-प्रदान भरपूर मात्रा में किया जाता है और यह परंपरा और रीति-रिवाजों का हिस्सा बन चुकी है। शगुन के तौर पर मुंह मीठा करना या करवाना भारतीय परिवेश में शुभ माना जाता है परंतु मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले रंगों को लेकर विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि मिठाइयों में रंगों का इस्तेमाल फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा तय मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए और प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे सेहत को काफी गंभीर खतरे हो सकते हैं 

कौन से हैं प्राकृतिक रंग 

पारंपरिक और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मिठाइयों में प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले रंगों का उपयोग होता है जैसे कि:
*पीला/सुनहरा रंग: केसर और हल्दी।
*हरा रंग: पिस्ता, पालक का रस या क्लोरोफिल।
*गुलाबी/लाल रंग: चुकंदर का रस, अनार या गुलाब की पंखुड़ियाँ।
*भूरा रंग: कोको, कॉफी या भुना हुआ खोया/शक्कर। 

कृत्रिम खाद्य रंग का विवरण

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण  द्वारा कुछ रासायनिक रंगों को तय सीमा में इस्तेमाल करने की अनुमति है जिनमे:
*टार्ट्राजिन पीले रंग की मिठाइयों और पेड़े-लड्डू में।
*ब्रिलियंट ब्लू  नीले या हरे रंग की मिठाइयों में।
*एलुरा रेड  लाल या गुलाबी बर्फी और रसगुल्लों में।
*फास्ट ग्रीन हरी बर्फी या अन्य मिठाइयों में।

प्रतिबंधित और खतरनाक रंग

बाजार में कई बार मिठाइयों को ज्यादा चमकीला दिखाने के लिए ऐसे खतरनाक रंगों का अवैध रूप से उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं।
*रोडामाइन-बी: यह एक गैर-खाद्य और चमड़ा रंगने (टैनिंग) में इस्तेमाल होने वाला केमिकल है।
*चंपई रंग, पुड़िया रंग और सम्राट रंग: स्थानीय स्तर पर जलेबी, रंग-बिरंगी बर्फी और चाट-पकौड़ी में पाए जाने वाले प्रतिबंधित केमिकल।
क्या है नुकसान: इनके अत्यधिक सेवन से लीवर, किडनी पर दबाव, पाचन संबंधी समस्याएं, और गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर) का खतरा बढ़ जाता है।
मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित (गैर-खाद्य) रंग स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक और जानलेवा हो सकते हैं। ये रंग आमतौर पर कपड़ों या चमड़े को रंगने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन कुछ मिलावटखोर मिठाइयों को ज्यादा चमकदार और आकर्षक दिखाने के लिए इनका अवैध इस्तेमाल करते हैं।

इन प्रतिबंधित रंगों से शरीर इन औद्योगिक केमिकल्स को आसानी से फिल्टर नहीं कर पाता। इससे लिवर में सूजन, टॉक्सिसिटी और लंबे समय में किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इन रंगों के सेवन से पेट में तेज दर्द, उल्टी, दस्त, अल्सर और आंतों में सूजन हो सकती है।
 कैंसर का खतरा:रोडामाइन-बी और मेटानिल येलो जैसे प्रतिबंधित रंगों को ‘कार्सिनोजेनिक’ (कैंसर पैदा करने वाला) माना गया है।इनका नियमित या अधिक मात्रा में सेवन शरीर में ट्यूमर और कैंसर कोशिकाओं को सक्रिय कर सकता है।

बच्चों के विकास पर असर: एकाग्रता में कमी  प्रतिबंधित रासायनिक रंग बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा असर डालते हैं। इससे बच्चों में हाइपरएक्टिविटी और ध्यान न लगाने की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा त्वचा और एलर्जी: त्वचा पर चकत्ते , खुजली और सांस लेने में तकलीफ (अस्थमा) जैसी एलर्जिक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।  कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसी फैक्ट्री पकड़ी थी जो एक्सपायर मिठाइयों को रिसाइकल करके उसमें प्रतिबंध और घातक रंगों का इस्तेमाल करते हुए दोबारा मिठाईया बनाई जा रही थी अब उन हलवाइयों का पता लगाया जा रहा है जो अपनी एक्सपायर हो चुकी मिठाइयां उसे बेचते थे।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

शहर के प्रमुख पेट के रोगों के विशेषज्ञ डा. दिनेश गुप्ता ने बताया कि प्रतिबंध रंगों वाली मिठाइयों के सेवन से घातक असर हो सकते हैं।  इसी प्रकार बासी और एक्सपायर मिठाइयां सेहत के लिए हानिकारक सिद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को मिठाइयों की खरीदारी करते समय ध्यान रखना चाहिए और मिठाईयां अच्छी दुकान से खरीदनी चाहिए, अगर कहीं कोई कमी पेशी नजर आती है तो स्वास्थ विभाग को सूचित करना चाहिए।

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