डबल इंजन सरकारें नशे का जखीरा पकड़ रही लेकिन पंजाब में गली-गली बिक रहा चिट्टा : चुग

On: October 19, 2026 9:02 AM
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चंडीगढ़ नितिन : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने पंजाब में नशे के कारोबार और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ हुई घटनाओं को लेकर भगवंत मान सरकार को कठघरे में खड़ा किया। चुग ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या, गुलजार सिंह की आत्महत्या और विक्रमजीत सिंह की हत्या तीन अलग-अलग घटनाएं भर नहीं हैं, बल्कि ये पंजाब में नशे के नेटवर्क, कानून-व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल हैं। जो लोग नशे के कारोबार को चुनौती देने के लिए सामने आते हैं, उनकी सुरक्षा का जिम्मा कौन लेगा? क्या पंजाब में नशा बेचने वालों से भिड़ना अब अपनी जान जोखिम में डालना बन गया है?

चुग ने कहा कि गुलजार सिंह ने अपने क्षेत्र में सिंथेटिक नशे की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे और इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ा। चुग ने कहा कि अब मान सरकार को केवल रिपोर्ट भेजकर औपचारिकता पूरी नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्पष्ट करना चाहिए कि गुलजार सिंह की मौत के पीछे के हालात की निष्पक्ष जांच में क्या कार्रवाई हुई और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए। जब एक पिता अपने इलाके में नशे की उपलब्धता पर सवाल उठाता है और उसकी मौत हो जाती है, तो सरकार की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में नशे की अधिक बरामदगी का तर्क पंजाब की समस्या का जवाब नहीं है। चुग ने कहा कि नशे की खेप पकड़ना और नशे की सप्लाई चेन तोड़ना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि पंजाब के गांवों, गलियों, बाजारों और मोहल्लों तक नशा पहुंच रहा है, तो सवाल यह है कि स्थानीय तस्करी नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। भगवंत मान बताएं कि दूसरे राज्यों में नशा पकड़े जाने के आंकड़े गिनाने के बजाय पंजाब में नशे की सप्लाई चेन तोड़ने, बड़े तस्करों को जेल पहुंचाने और युवाओं तक नशा पहुंचने से रोकने के लिए उनकी सरकार ने क्या ठोस कार्रवाई की है।

चुग ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के झोटा हत्याकांड पर दिए गए बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की भूमिका पर सवाल खड़े करने से सरकार की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार का काम नशा तस्करी के खिलाफ खड़े लोगों को कटघरे में खड़ा करना है या तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करना? उन्होंने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि गुलजार सिंह, झोटा और विक्रमजीत सिंह के मामलों में जनता को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और कार्रवाई चाहिए।

चुग ने कहा कि पंजाब में अब बैठकों, विज्ञापनों और नशा-मुक्ति के दावों से काम नहीं चलेगा। सरकार को तीनों मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, दोषियों को सजा दिलानी चाहिए और नशा माफिया को किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों की जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब की असली परीक्षा यह नहीं है कि सरकार कितनी बैठकें करती है, बल्कि यह है कि नशा बेचने वाले कितने नेटवर्क तोड़े गए, कितने बड़े तस्कर जेल पहुंचे और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कितने लोगों को सुरक्षा मिली। भगवंत मान सरकार को इन सवालों का जवाब देना ही होगा।

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