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बिहार में बाढ़ का कहर, गंडक नदी का पानी घटा फिर भी खतरा बरकरार, सारण, गोपालगंज व पश्चिम चंपारण में तबाही

On: October 4, 2026 11:08 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में आई दूसरे चरण की बाढ़ से अभी तक सर्वाधिक तबाही सारण, गोपालगंज एवं पश्चिम चंपारण जिले में हुई है। जहां गंडक नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। लेकिन, तटबंधों पर खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। सारण के रेवाघाट में गंडक का जलस्तर उच्चतम स्तर से 71 सेंटीमीटर एवं वैशाली के लालगंज में 32 सेंटीमीटर नीचे आया है। इसके बावजूद दोनों स्थानों पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से क्रमशः 0.56 मीटर एवं 2 मीटर ऊपर बना हुआ है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की निगरानी व संवेदनशील स्थानों पर रात में विशेष पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। सारण के पानापुर प्रखंड में तटबंध टूटने से बाढ़ की दस्तक के साथ ही हादसों का सिलसिला शुरू हो गया है। बाढ़ के पानी में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई है। जबकि, दो अन्य युवकों को ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बचा लिया है। मृतकों की पहचान खजुरी गांव निवासी मंजय कुमार के 17 वर्षीय पुत्र सत्यम कुमार और चकिया गांव निवासी सुरेंद्र राय के पुत्र अनिल राय के रूप में हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार, सत्यम कुमार और अनिल राय सहित 4 युवक बाढ़ के पानी के बीच सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान पानी की तेज धारा में चारों युवक बहने लगे। युवकों को डूबता देख आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और काफी प्रयास के बाद दो युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। तेज बहाव के कारण सत्यम कुमार और अनिल राय पानी में बह गए। दोनों का काफी देर तक पता नहीं चल सका। घटना की सूचना मिलने के बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और तलाश शुरू की। टीम ने दोनों युवकों के शव को बरामद कर लिया। दोनों युवकों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में चीख-पुकार मच गई। आसपास के गांवों में भी घटना के बाद शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने बाढ़ के तेज बहाव वाले रास्तों पर लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

उधर, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर सारण में दो हेलीकॉप्टर के अतिरिक्त 5 जिलों से ट्रक से बाढ़ राहत सामग्री पहुंचाई जा रही। 24 घंटे पेट्रोलिंग के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। ताकि, तटबंधों पर होने वाले रिसाव, सीपेज, पाइपिंग, कटाव अथवा किसी अन्य क्षति की समय रहते पहचान कर तत्काल फ्लड फाइटिंग शुरू की जा सके। विभागीय स्तर पर तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखें और किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना मिलते ही आवश्यक बचाव कार्य शुरू करें। गंडक के दोनों तटबंधों पर पानी के दबाव में कुछ कमी आई है और क्रिटिकल सीपेज एवं पाइपिंग की स्थिति भी पहले की तुलना में कम हुई है। हालांकि, स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। तटबंधों के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त फ्लड फाइटिंग मटेरियल का स्टाक किया जा रहा है।इधर, सारण जिले के पानापुर एवं मकेर प्रखंड में क्षतिग्रस्त तटबंधों से निकला पानी आसपास के विस्तृत क्षेत्र में फैल रहा है। यह पानी पानापुर, करचौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा होते हुए आगे बढ़ रहा है और दरियापुर प्रखंड के हरदिया चौर में एकत्रित होगा। विभाग के अनुसार, हरदिया चौर से अतिरिक्त पानी मुगल कैनाल के रास्ते गंगा नदी तथा नेउरा और काकरा नाला के माध्यम से गंडक नदी में प्रवाहित होगा। वर्तमान आकलन के अनुसार, संभावित अतिरिक्त जलप्लावन क्षेत्र करीब 22617 हेक्टेयर है। जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निगरानी और बचाव कार्यों में लगे कर्मियों को अलर्ट किया है। रात में भी लगातार पेट्रोलिंग से संवेदनशील स्थलों पर संभावित रिसाव, कटाव और अन्य क्षति की समय रहते पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

राजधानी पटना से 10,000, सिवान से 15,000, भोजपुर से 5,000, बक्सर से 5,000 और वैशाली से 5,000 राशन पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस प्रकार विभिन्न जिलों से कुल 40,000 राशन पैकेट सारण भेजे गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर से 5000 से अधिक राशन पैकेट एयर ड्रॉप किए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर सारण में बाढ़ प्रभावितों के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 19 टीमें तैनात हैं, जो राशन पैकेट और पॉलीथिन शीट जैसी सामग्री वितरित कर रही हैं।

सारण में पहले से एनडीआरएफ की 5 तथा एसडीआरएफ की 3 टीम तैनात है। राहत एवं बचाव कार्यों को और सुदृढ़ करने के लिए बेतिया से एनडीआरएफ की 3 टीम, गोपालगंज से 2 टीम, भागलपुर से 2 टीम तथा सुपौल से 1 अतिरिक्त टीम सारण भेजी गई है। इसके अतिरिक्त मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर एवं पूर्वी चंपारण से एसडीआरएफ की 4 टीमें सारण भेजी गई हैं। इस प्रकार सारण जिले में एनडीआरएफ की कुल 12 टीम तथा एसडीआरएफ की कुल 7 टीम, अर्थात कुल 19 टीम, व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ की प्रत्येक टीम में 30 प्रशिक्षित मानवबल के साथ 05 बोट, 30 लाइफबॉय, 40 लाइफ जैकेट, 02 डीप डाइव सेट तथा राहत एवं बचाव कार्य से संबंधित अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। इन संसाधनों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा सारण में राहत एवं बचाव कार्य में लगी एनडीआरएफ की 12 टीमों में कुल 360 प्रशिक्षित मानवबल तैनात हैं। इन टीमों के पास 50 से अधिक नाव, 480 लाइफ जैकेट और 360 लाइफबॉय उपलब्ध हैं।

एसडीआरएफ की तैनात की जा रही टीमों में भी पर्याप्त मानवबल एवं बोट उपलब्ध हैं। शुक्रवार को भेजे गए दरभंगा एसडीआरएफ टीम में 20 मानवबल एवं 4 बोट, मधुबनी टीम में 20 मानवबल एवं 6 बोट, समस्तीपुर टीम में 19 मानवबल एवं 6 बोट तथा पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) की टीम में 18 मानवबल एवं 6 बोट शामिल हैं। इस प्रकार, एसडीआरएफ की टीमों के कुल 140 से अधिक प्रशिक्षित मानवबल तथा 36 से अधिक बोट राहत एवं बचाव कार्य में तैनात हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न जिलों से कुल 75,000 पॉलिथीन शीट सारण भेजी जा रही हैं। इनमें दरभंगा से 25,000, मधुबनी से 20,000, सीतामढ़ी से 15,000 तथा समस्तीपुर से 15,000 पॉलिथीन शीट शामिल हैं। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री के वितरण, बचाव कार्यों तथा आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता की लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ की स्थिति एवं आवश्यकता के अनुसार, अतिरिक्त संसाधनों की तैनाती तथा राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आपदा प्रबंधन विभाग आपदा पीड़ितों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने हेतु दृढ़ संकल्पित तथा प्रतिबद्ध है। साथ ही, कट-एंड को सुरक्षित करने और टैगिंग का कार्य भी जारी है।

बता दें कि, सारण में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से पानापुर में तटबंध टूटने से दर्जनों गांव डूबे चुके हैं। जबकि, 3 लोगों की मौत और 5 लापता हैं। सारण जिले के मकेर, पानापुर, तरैया, अमनौर, परसा, दरियापुर और दिघवारा सहित कई प्रखंडों में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच पानापुर के सरौजा भगवानपुर गांव के समीप गुरुवार की सुबह करीब 4 बजे सारण तटबंध टूट गया। तटबंध टूटते ही तेज रफ्तार से बाढ़ का पानी आसपास के दर्जनों गांवों में प्रवेश कर गया। इससे हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं और लोग घर छोड़कर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। मकेर के सुल्तानगंज में बाढ़ के पानी में डूबने से 30 वर्षीय बबन महतो की मौत हो गई। बताया जाता है कि वह अपने मवेशी को बाढ़ के पानी से निकालकर सुरक्षित स्थान की ओर ले जा रहे थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह तेज धारा में बह गए। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें पानी से बाहर निकाला और इलाज के लिए स्थानीय पीएचसी ले गए। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पानापुर में भी बाढ़ के पानी ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। खजुरी गांव निवासी मंजय कुमार के 17 वर्षीय पुत्र सत्यम कुमार और चकिया गांव निवासी सुरेंद्र राय के पुत्र अनिल राय की डूबने से मौत हो गई है।

वैसे, बिहार के 7 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सारण, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सुपौल में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। मिली जानकारी के अनुसार, करीब पौने तीन लाख लोग बाढ़ के बीच घिरे हुए हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर और कई इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने से राहत एवं बचाव कार्यों के सामने चुनौती बढ़ गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जिन क्षेत्रों में सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल हो रहा है, वहां हवाई माध्यम से मदद पहुंचाई जारी है।

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