लेख :- आदर अदीब पावेल बन्धुजिला सूचना अधिकारीलखनऊ
उत्तर प्रदेश : भारत में सड़कों का इतिहास आवागमन की सुविधा के साथ-साथ सभ्यता के विकास, आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक एकीकरण की जुबानी भी है। प्राचीन काल में जब आधुनिक अर्थों में सड़क निर्माण की तकनीक उपलब्ध नहीं थी, तब भी भारत में नगरों, ग्रामों, व्यापारिक केंद्रों और तीर्थस्थलों को जोड़ने के लिए व्यवस्थित मार्गों का निर्माण किया जाता था। मौर्यकाल में पाटलिपुत्र जैसे महत्वपूर्ण नगरों को दूरस्थ क्षेत्रों से जोड़ने वाले मार्ग विकसित हुए। सम्राट अशोक के समय यात्रियों की सुविधा के लिए मार्गों के किनारे वृक्षारोपण, कुओं और विश्राम स्थलों की व्यवस्था किए जाने के उल्लेख मिलते हैं। आगे चलकर शेरशाह सूरी द्वारा विकसित ग्रैंड ट्रंक रोड ने उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही परंपरा आधुनिक भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और चौड़ी एवं सुदृढ़ सड़कों के रूप में निरंतर आगे बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य के विकास में सड़कें जीवन रेखा का कार्य करती हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तथा बुंदेलखंड से तराई क्षेत्र तक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को गति देने के लिए मजबूत सड़क नेटवर्क आवश्यक है। वास्तव में सड़कें केवल दो स्थानों को जोड़ने का माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि गांवों को बाजारों से, किसानों को मंडियों से, युवाओं को रोजगार के अवसरों से, उद्योगों को कच्चे माल और बाजारों से तथा तीर्थस्थलों को श्रद्धालुओं से जोड़ने वाला सशक्त आधारभूत ढांचा हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़कों के निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण, चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का व्यापक कार्य किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में से एक है, जो सड़कों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत एवं रखरखाव, नदियों पर सेतु निर्माण तथा सरकारी भवनों के निर्माण और अनुरक्षण जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करता है।
विगत वर्षों में सड़क नेटवर्क को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। यातायात को सुगम, सुरक्षित और तेज बनाने के उद्देश्य से राज्य योजना, राज्य सड़क निधि, धर्मार्थ योजना, औद्योगिक लॉजिस्टिक, केंद्रीय मार्ग निधि, विश्व बैंक परियोजना तथा एशियन विकास बैंक जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। उदाहरणार्थ, वर्ष 2017 से अब तक विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लगभग 29,949 किलोमीटर लंबाई में मार्गों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य किया गया है। यह उपलब्धि प्रदेश में सड़क अवसंरचना के व्यापक विस्तार और गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय मार्ग एवं अवसंरचना निधि योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में 3,035 करोड़ रुपये की लागत से 117 प्रमुख जिला मार्गों एवं अन्य जिला मार्गों की 1,828 किलोमीटर लंबाई को दो लेन में चौड़ीकरण का कार्य किया गया और इन कार्यों को शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में 1,332 करोड़ रुपये की लागत से 54 प्रमुख जिला मार्गों एवं अन्य जिला मार्गों की 667 किलोमीटर लंबाई के चौड़ीकरण का कार्य पूर्ण किया गया।
धर्मार्थ मार्गों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश में धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों का महत्व केवल आस्था तक सीमित न होकर पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों के रूप में भी है। धर्मार्थ मार्गों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण, नवनिर्माण एवं विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलती है। वर्ष 2022-23 से अब तक धर्मार्थ विभाग की स्वीकृति से 424 कार्यों के लिए लगभग 1,728 किलोमीटर मार्ग लंबाई तथा 8,185.45 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। इनमें 161 कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि शेष कार्य प्रगति पर हैं।
औद्योगिक विकास की गति को तेज करने में भी सड़क संपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने तथा प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को गति देने के लिए औद्योगिक और लॉजिस्टिक पार्कों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा रही है। औद्योगिक पार्कों और लॉजिस्टिक पार्कों को न्यूनतम दो लेन वाले मार्गों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि उद्योगों के लिए माल की आवाजाही तेज और सुगम हो सके। वित्तीय वर्ष 2022-23 में इसके लिए नई मद सृजित की गई। वर्ष 2023-24 से अब तक 75 कार्यों के लिए लगभग 343.689 किलोमीटर लंबाई और 2,809.81 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। इनमें 19 कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा शेष कार्य प्रगति पर हैं।
उत्तर प्रदेश के सड़क विकास में नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का विकास भी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में निर्मित अनेक राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पूर्व से पश्चिम की दिशा में संचालित होते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास, सामाजिक एवं सामरिक दृष्टिकोण से नेपाल सीमा से जुड़े जनपदों तक बेहतर संपर्क स्थापित करने तथा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन को मजबूत करने के लिए उत्तर-दक्षिण दिशा में सड़क संपर्क का विस्तार आवश्यक है। यह प्रयास क्षेत्रीय संतुलित विकास और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
सड़क निर्माण के साथ-साथ सड़कों को गड्ढामुक्त बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गड्ढे केवल आवागमन की गति को प्रभावित नहीं करते, बल्कि वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकते हैं। इसी दृष्टि से गड्ढा मुक्त सड़क अभियान के माध्यम से सड़कों की नियमित मरम्मत, पैचवर्क और आवश्यकतानुसार सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया जाता है। सड़क के निर्माण के साथ उसका अनुरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण सड़क वही है जो लंबे समय तक सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराए। गड्ढा मुक्त सड़कों का उद्देश्य केवल सड़क की सतह को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि सुरक्षित यातायात, सुगम आवागमन और बेहतर जनसुविधा सुनिश्चित करना भी है।
सड़क निर्माण की गति के साथ उसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। आधुनिक शासन व्यवस्था में केवल सड़क बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो, निर्धारित समय में पूरा हो और जनता के धन का उचित उपयोग हो। इसी उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग द्वारा विभिन्न ऑनलाइन पोर्टल विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से कार्यों की निगरानी और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है। 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों को ई-टेंडरिंग के माध्यम से कराया जा रहा है। विभाग की निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए ई-टेंडरिंग व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। इसके साथ ही बजट पंजीकरण, ई-एमबी, ई-बिलिंग, ई-डिमांड और ई-अलॉटमेंट जैसी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। इससे सरकारी कार्यों में तकनीक के प्रयोग के साथ जवाबदेही भी बढ़ी है।
आम जनता की सहभागिता और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्टेट लेवल कमेटी एवं क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण और टेस्टिंग की व्यवस्था की गई है। इससे सड़क निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया को संस्थागत मजबूती मिली है।
प्रदेश में सड़क निर्माण की बढ़ती गति का अंदाजा पुराने और वर्तमान आंकड़ों की तुलना से भी लगाया जा सकता है। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2016-17 की तुलना में वर्ष 2017 के बाद मार्गों के नवनिर्माण और चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आई है। वर्तमान व्यवस्था में लगभग 11 किलोमीटर प्रतिदिन की औसत गति से मार्गों का नवनिर्माण तथा लगभग 9 किलोमीटर प्रतिदिन की औसत गति से मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि प्रदेश में सड़क अवसंरचना का विस्तार व्यापक स्तर पर हो रहा है।
सड़क विकास का प्रभाव केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़कें किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सहायता करती हैं। विद्यार्थियों के लिए विद्यालय और महाविद्यालय तक पहुंच आसान होती है। मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचने में समय की बचत होती है और ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। इस प्रकार सड़कें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही हैं।
बेहतर सड़क नेटवर्क पर्यटन के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज, चित्रकूट, विंध्य क्षेत्र तथा अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक सुगम संपर्क बनने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को सुविधा मिलती है। सड़कें तीर्थ और पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ती हैं तथा होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, छोटे व्यापार और अन्य सेवाओं के लिए नए अवसर पैदा करती हैं।
आज उत्तर प्रदेश सड़क विकास के ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां परंपरागत मार्गों के स्थान पर चौड़े, सुदृढ़, सुरक्षित और आधुनिक मार्गों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे और आधुनिक राजमार्गों के साथ जिला एवं ग्रामीण मार्गों का सुदृढ़ीकरण प्रदेश के विकास को बहुआयामी आधार प्रदान कर रहा है। सड़क निर्माण अब केवल ईंट, गिट्टी और डामर बिछाने का कार्य नहीं, अपितु यह आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार, सामाजिक समरसता, पर्यटन संवर्धन और रोजगार सृजन की व्यापक रणनीति का हिस्सा बन चुका है।
प्राचीन भारत में जिन पथों ने सभ्यताओं और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ा था, वही परंपरा आज आधुनिक तकनीक और नई विकास दृष्टि के साथ आगे बढ़ रही है। अंतर केवल इतना है कि आज के मार्ग अधिक चौड़े, अधिक सुरक्षित और अधिक तकनीकी रूप से सक्षम हैं। उत्तर प्रदेश में लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जा रहे सड़क विकास के प्रयास इसी ऐतिहासिक यात्रा को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। मजबूत सड़कें मजबूत संपर्क का आधार हैं और मजबूत संपर्क ही विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला है। आने वाले समय में गुणवत्तापूर्ण और गड्ढा मुक्त सड़क नेटवर्क प्रदेश के गांवों, शहरों, उद्योगों, कृषि केंद्रों, धार्मिक स्थलों और सीमावर्ती क्षेत्रों को एक ऐसी विकास श्रंखला में जोड़ने का कार्य करेगा, जो उत्तर प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।












