राष्ट्रीय ( नितिन ) : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिणी परिसर (साउथ कैंपस) के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। यहां लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल की जा रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मलबे में फंसे 15-20 अन्य लोगों को बाहर निकालने के लिए देर रात तक विभिन्न एजेंसियों का बचाव अभियान जारी रहा।
एम्स ट्रॉमा सेंटर लाए गए घायल, 5 ने तोड़ा दम
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा जारी बयान के अनुसार, अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 घायल लोगों को लाया गया था। इनमें से चार लोगों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि बेहद गंभीर हालत में भर्ती कराए गए एक अन्य मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। फिलहाल तीन घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से एक की सर्जरी की गई है, वहीं मामूली चोट वाले एक मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
बेसमेंट में पानी भरने और मरम्मत कार्य से कमजोर हुई नींव
यह हादसा रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे हुआ, जब इमारत के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूतल पर चल रहे इसी मरम्मत कार्य के कारण यह हादसा हुआ। निवासियों ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश की वजह से इमारत के बेसमेंट में पानी जमा होने लगा था, जिससे इसकी नींव बेहद कमजोर हो गई थी।
नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई थी 5 मंजिला बिल्डिंग
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुनर्वास कॉलोनी में मात्र 55 वर्ग गज के क्षेत्र में बनी इस इमारत के लिए केवल भूतल और एक मंजिल (जी प्लस 1) के निर्माण की अनुमति दी गई थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इसे पांच मंजिला (जी प्लस 4) बना दिया गया था। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पास की ही एक अन्य इमारत को सील कर दिया है, जिसका इस्तेमाल महिला पीजी के तौर पर किया जा रहा था, और वहां रह रहे सभी किरायेदारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
युद्ध स्तर पर चला राहत और बचाव कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की दो टीमें (70 कर्मियों के साथ) और श्वान दस्ता मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे लोगों को सांस लेने में मदद के लिए तुरंत ऑक्सीजन सिलेंडर नीचे पहुंचाए गए। घटनास्थल पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस), डीडीएमए, एमसीडी, ‘कैट’ और नागरिक सुरक्षा की टीमें बचाव कार्य में जुटी रहीं। स्थानीय लोग भी अपने स्तर पर औजारों की मदद से मलबे को हटाने में हाथ बंटाते दिखे। मलबे में दबे कुछ बेबस छात्रों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें भी सामने आईं, जहां वे मदद के लिए मोबाइल से फोन करते दिखे।
मजिस्ट्रेट जांच के आदेश, मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा किया और एम्स ट्रॉमा सेंटर जाकर घायलों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि मुख्यमंत्री ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच और भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के आदेश दिए हैं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की बात कही है।
पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही बरतने और सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमों का गठन किया गया है।
एबीवीपी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की
इस हादसे से नाराज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के करीब 150-200 छात्र नगर निगम मुख्यालय ‘सिविक सेंटर’ के बाहर इकट्ठा हुए और दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ छात्रों ने जबरन मुख्य इमारत में घुसने की कोशिश की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने करीब 15 छात्रों को हिरासत में लेकर कमला मार्केट थाने भेजा, जहां उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।










