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झांसी में 403 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर घोटाले का पर्दाफाश, 6 ठग गिरफ्तार

On: August 28, 2026 4:17 PM
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झांसी (हरिमोहन श्रीवास)
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विकास कुमार के निर्देशन में झांसी की प्रेमनगर पुलिस और साइबर सेल की टीम को एक बहुत बड़ी देशव्यापी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने संगठित रूप से चल रहे वित्तीय अपराध और साइबर ठगी के एक विशाल सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के बैंक खातों में 403 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है, जिसे पुलिस ने तत्काल प्रभाव से सीज (फ्रीज) करवा दिया है। इसके अलावा, आरोपियों के डिजिटल वॉलेट से 500 से अधिक USDT (क्रिप्टोकरेंसी) भी बरामद की गई है।


मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर क्राइम) आईपीएस अरीबा नोमान ने बताया कि यह गिरोह देश भर के विभिन्न हिस्सों में होने वाले साइबर फ्रॉड के पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ठिकाने लगाने (लेयरिंग) का काम कर रहा था।

ई-रिक्शा चालक का बेटा निकला महाठग, 1 साल में 22 करोड़ की कमाई
पुलिस जांच में इस पूरे सिंडिकेट का जो मास्टरमाइंड सामने आया है, उसकी प्रोफाइल चौंकाने वाली है। गिरोह का मुख्य सरगना प्रेमनगर के गरिया फाटक का रहने वाला अरमान है। अरमान के पिता झांसी में ई-रिक्शा चलाकर परिवार पालते हैं, लेकिन अरमान ने साइबर अपराधियों से हाथ मिलाकर मनी लॉन्ड्रिंग का इतना बड़ा जाल बिछाया कि उसने पिछले एक साल के भीतर करीब 22 करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति कमा डाली। मास्टरमाइंड अरमान और उसके दो साथी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।

60 बैंक खातों का मायाजाल और झांसी कनेक्शन
आईपीएस अरीबा नोमान के मुताबिक, जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए ठगों ने देश भर के विभिन्न बैंकों में 60 बैंक खातों का एक जटिल नेटवर्क तैयार कर रखा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन 60 खातों में से 35 खाते अकेले झांसी के ही अलग-अलग बैंकों में खुलवाए गए थे। गिरफ्तार किए गए स्थानीय आरोपी इन खातों को संभालते थे। जैसे ही साइबर ठगी का पैसा इन खातों में आता, आरोपी कमीशन काटकर उसे तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे ताकि मुख्य स्रोत का पता न लगाया जा सके।

बरामद USDT और क्रिप्टो करेंसी का खेल
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 500 से अधिक USDT बरामद की हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बैंक खातों में आए 403 करोड़ रुपये के बड़े हिस्से को आरोपी बैंकों से नकद निकालने के बजाय तुरंत क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से USDT (Tether) में बदल देते थे। USDT एक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी है जिसकी कीमत अमेरिकी डॉलर के बराबर स्थिर रहती है। क्रिप्टो में बदलने के बाद इस रकम को पलक झपकते ही अंतरराष्ट्रीय डिजिटल वॉलेट्स या मुख्य अपराधियों को ट्रांसफर कर दिया जाता था, जिससे पैसे के अंतिम मालिक को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था।

पुलिस और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरोह के इन 6 सक्रिय सदस्यों को दबोचा है:

  1. दीपक वर्मा उर्फ सत्यम (निवासी: ईसाई टोला, प्रेमनगर)
  2. अदनान हुसैन (निवासी: महादेव टाइल्स के सामने, झांसी होम्स, प्रेमनगर)
  3. आदिल हुसैन (निवासी: महादेव टाइल्स के सामने, झांसी होम्स, प्रेमनगर)
  4. जानपाल (निवासी: कृष्णा नगर कॉलोनी, प्रेमनगर)
  5. अभिषेक चौधरी (निवासी: सुममेर नगर, प्रेमनगर)
  6. अर्चित अग्रवाल (निवासी: लहर गिर्द)


पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 कीमती स्मार्टफोन और एक महत्वपूर्ण डायरी बरामद की है। इस डायरी में इस पूरे 403 करोड़ के सिंडिकेट, उनके कमीशन के प्रतिशत और विभिन्न फर्जी बैंक खातों का पूरा लेखा-जोखा कोडिंग वर्ड में दर्ज है।

मुख्य मास्टरमाइंड अरमान, उसके साथी अर्श शेख़ और मोहम्मद फैज (सभी निवासी: गाड़िया फाटक, प्रेमनगर) फिलहाल फरार हैं। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के तार देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी जुड़े होने की आशंका है। इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ भी इनपुट साझा किए जा रहे हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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