बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। बिहार में आगामी 24 अगस्त को सावन के पवित्र महीने की आखिरी सोमवारी के अवसर पर लखीसराय के ऐतिहासिक अशोकधाम स्थित इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु केवल अरघा के माध्यम से ही बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण कर सकेंगे। 17 अगस्त को तीसरी सोमवारी के दौरान भीड़ प्रबंधन की विफलता के कारण मची दर्दनाक भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत और 27 लोगों के जख्मी होने की त्रासदी के बाद जिला प्रशासन व मंदिर ट्रस्ट ने यह बड़ा सुधारात्मक कदम उठाया है।
आखिरी सोमवारी को अप्रत्याशित भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए शुक्रवार यानी 21 अगस्त को अशोकधाम मंदिर परिसर स्थित प्रशासनिक कार्यालय में अधिकारियों और मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच घंटों तक मैराथन बैठक चली। जहां इस उच्चस्तरीय मंथन के बाद सुरक्षा कारणों से अरघा व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू करने पर अंतिम मुहर लगाई गई। नई सुरक्षा योजना के तहत, आने वाले श्रद्धालुओं को पहले अशोकधाम रेलवे स्टेशन के पास स्थित बड़े पार्किंग क्षेत्र यानी होल्डिंग एरिया में ठहराया जाएगा। वहां से नियंत्रित जत्थों में श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर की ओर आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर एक साथ भीड़ का अत्यधिक दबाव नहीं बनेगा। तीसरी सोमवारी जैसी अफरा-तफरी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भीड़ को एक साथ मंदिर द्वार तक पहुंचने से रोकना ही प्रशासन की मुख्य रणनीति है।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर परिसर के भीतर की तुलना में असली खतरा बाहर की स्टेशन रोड पर है। मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार की ओर जाने वाली यह मुख्य सड़क पूर्व से ही संकरी है और दोनों तरफ फैले अवैध अतिक्रमण व दुकानों के कारण मार्ग और संकरा हो जाता है। इतने बड़े हादसे के बावजूद प्रशासन द्वारा स्टेशन रोड को अतिक्रमणमुक्त कराने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ जुटने की परंपरा रही है। ऐसे में यदि एप्रोच रोड पर आवागमन को सुगम और चौड़ा नहीं किया गया, तो केवल अरघा और पार्किंग प्रबंधन से स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
दूसरी ओर अशोकधाम स्थित इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी को मची भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत और दर्जनों लोगों के जख्मी होने की घटना को लेकर देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार रह चुके जन सुराज पार्टी के सूत्रधार व बांकीपुर के नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर यानी पीके ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। बिहार विधानसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद मंगलवार को लखीसराय पहुंचकर पीड़ित परिवारों और घायलों से मुलाकात करने के बाद पीके ने आरोप लगाया कि सरकार ने 7 बेकसूर जिंदगियों की कीमत महज 4-4 लाख रुपये लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बांटकर सांत्वना देने का दिखावा किया जा रहा है। जबकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार अपनी घोर नाकामी और लापरवाही को छिपाने में जुटी है।

प्रशांत किशोर ने लखीसराय पहुंचते ही सबसे पहले बड़हिया का रुख किया, जहां उन्होंने भगदड़ में जान गंवाने वाली मनमाला देवी के शोकाकुल परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। इसके बाद वे बालगुदर और निशा नर्सिंग होम पहुंचे, जहां इलाजरत घायलों का कुशलक्षेम जाना और डॉक्टरों से बेहतर इलाज का आग्रह किया। इसके उपरांत पीके हलसी प्रखंड के प्रतापपुर गांव पहुंचे, जहां एक ही परिवार की तीन गोतनियों की मौत से पसरे मातम के बीच परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रशांत किशोर ने प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सावन के सोमवार को अशोकधाम में लाखों की भीड़ जुटने की जानकारी प्रशासन को पहले से थी। इसके बावजूद भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और बैरिकेडिंग को लेकर जो पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे, वे नदारद थे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों में पुलिस व्यवस्था को लेकर गहरा रोष है। जिले के आला पुलिस अधिकारी फुल टाइम उपलब्ध नहीं रहते, जिसके चलते इतने बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और यह भीषण हादसा हुआ।
चर्चित चुनावी रणनीतिकार से विधायक बने प्रशांत किशोर ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 7 मौतों के बाद भी डीएम, एसपी, एसडीएम, एसडीपीओ या थानेदार तो दूर, किसी एक सिपाही तक को निलंबित नहीं किया गया है। बिहार में जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, तो मुआवजा देकर मामले को रफा-दफा करने का चलन बन गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों की देखरेख में लापरवाही हुई, वही अपनी गलती की जांच कैसे कर सकते हैं? यह जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति है। प्रशांत किशोर ने सदर अस्पताल की बदहाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई जख्मी शाम होते-होते निजी क्लीनिकों में जाने या घर लौटने को मजबूर हो गए। उन्होंने दो टूक कहा कि पीड़ित परिवारों को केवल मुआवजे का चेक नहीं, बल्कि न्याय चाहिए। घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर तत्काल आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।










