National ( नोटिन ): बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। BCI के को-चेयरमैन और सीनियर एडवोकेट YR सदाशिव रेड्डी ने मिश्रा के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें पत्र लिखा है। रेड्डी ने कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत गठित वैधानिक संस्था है और इसके संसाधन और अधिकार देश के वकीलों के हित में इस्तेमाल होने चाहिए।
उठे रहे कई गंभीर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, रेड्डी ने अपने पत्र में मिश्रा के कार्यकाल को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। इनमें करीब ₹150 करोड़ के फंड के कथित गलत इस्तेमाल, परिवार के सदस्यों की नियुक्तियों और NALSAR के छात्रों के खिलाफ कथित ‘गैर-कानूनी’ कार्रवाई जैसे आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये सभी आरोप रेड्डी द्वारा लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।
‘मैं विरोधी के तौर पर नहीं, चुने हुए सदस्य के तौर पर लिख रहा हूं’
रेड्डी ने कहा कि उन्होंने मिश्रा को यह पत्र किसी व्यक्तिगत दुश्मनी या राजनीतिक विरोध के कारण नहीं लिखा है। उनके मुताबिक, वह BCI के निर्वाचित सदस्य हैं और तीन दशकों से अधिक समय से कानूनी पेशे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चुप रहना देश के वकीलों द्वारा उन पर जताए गए भरोसे के साथ न्याय नहीं होगा। रेड्डी ने यह भी कहा कि BCI के पास लाखों वकीलों से जुड़े संसाधन और फंड हैं तथा संस्था का काम कानूनी पेशे को रेगुलेट करना और उसके हितों की रक्षा करना है। उनके अनुसार, इन संसाधनों और शक्तियों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या पद के हित में नहीं होना चाहिए।
15 दिन में इस्तीफे की मांग
रेड्डी ने मिश्रा से पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा के लिए BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने BCI और BCI ट्रस्ट PEARL First के खातों के विशेष ऑडिट की मांग भी रखी है। इसके अलावा उन्होंने BCI या उससे जुड़े ट्रस्ट अथवा संस्थाओं द्वारा लॉ कॉलेजों, विश्वविद्यालयों या मैनेजमेंट से मिलने वाले योगदान, दान अथवा भुगतान को तत्काल रोकने की मांग की है।










