पंजाब (नितिन): रेलवे अब स्टेशन से स्टेशन तक पार्सल पहुंचाने की मौजूदा व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए खुद को व्यापक माल एवं पार्सल परिवहन सेवा के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसी दिशा में रेलवे की ओर से ‘रेल पार्सल एप्प’ शुरू किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्राहक घर बैठे पार्सल की बुकिंग कर सकेंगे और इसके लिए उन्हें रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय तक जाने की जरूरत नहीं होगी। एप्प पर ही डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध होगी तथा सामान की पिकअप और डिलीवरी की व्यवस्था भी इसी माध्यम से जोड़ी जाएगी।
रेल पार्सल एप्प को देशभर में शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसे चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही अथवा वित्त वर्ष 2027-28 की शुरुआत में शुरू किए जाने का प्रस्ताव है। इससे पहले फरवरी में दक्षिण मध्य रेलवे में एप्प की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जा चुका है। परीक्षण के बाद सामने आए अनुभवों के आधार पर इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत ग्राहक मोबाइल एप्प के माध्यम से अपने पार्सल की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के दौरान सामान से संबंधित जानकारी दर्ज करने के साथ डिजिटल माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। इसके बाद सामान को ग्राहक के घर या निर्धारित स्थान से उठाने की व्यवस्था की जाएगी। रेलवे इसके लिए निजी डिलीवरी एवं लॉजिस्टिक्स कंपनियों की सेवाएं लेने की योजना बना रहा है। इस तरह सामान के घर से उठाए जाने, रेलवे के माध्यम से लंबी दूरी तक पहुंचने और अंतिम स्थान तक डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया को एक ही व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
रेलवे का मानना है कि नई सुविधा शुरू होने से छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों के लिए पार्सल भेजना आसान होगा। वर्तमान में पार्सल भेजने के लिए सामान रेलवे स्टेशन तक पहुंचाना पड़ता है और वहां बुकिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। नई व्यवस्था में इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। रेल पार्सल एप के जरिए छोटे पार्सल, ई-कॉमर्स से जुड़े सामान, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के उत्पाद तथा सड़क परिवहन से रेल परिवहन की ओर आने वाले माल को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे ऐसे कारोबारियों को भी रेलवे की माल परिवहन क्षमता का लाभ मिल सकेगा, जो फिलहाल छोटी मात्रा में सामान भेजते हैं।
तेजी से बढ़ रहा पार्सल कारोबार
भारत में कूरियर एक्सप्रैस और पार्सल बाजार का आकार 2026 में करीब 9.6 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार यह बाजार 2031 तक बढ़कर 17.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रेलवे इसी बढ़ते कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है। रेलवे की नई व्यवस्था में लंबी दूरी के परिवहन के लिए रेल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि सामान को ग्राहक तक पहुंचाने के शुरुआती और अंतिम चरण की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को दी जा सकती है। इससे रेलवे और निजी क्षेत्र की क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करने का रास्ता तैयार होगा।
छोटे कारोबारियों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्हें कम मात्रा में सामान भेजने के लिए भी व्यापक रेल नेटवर्क उपलब्ध हो सकेगा। ई-कॉमर्स कारोबार के बढ़ने के साथ छोटे पार्सल की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और रेलवे इस क्षेत्र को अपने माल परिवहन नैटवर्क से जोड़ना चाहता है।
रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.67 अरब टन माल भेजा है। माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे की ओर से माल ढुलाई गलियारों, विद्युतीकरण, अतिरिक्त वैगन और इंजन तथा आधुनिक सिग्नल व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ाने के साथ परिवहन को अधिक सुचारू बनाना है। रेलवे की बढ़ती माल ढुलाई क्षमता का लाभ भविष्य में पार्सल परिवहन को भी मिलने की उम्मीद है। लंबी दूरी पर सामान को तेजी और अपेक्षाकृत व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने के लिए रेल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा।
128 गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल शुरू
रेलवे ने माल परिवहन को मजबूत करने के लिए देशभर में 128 गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल शुरू किए हैं। इसके अलावा 292 अन्य स्थानों पर टर्मिनल स्थापित करने की प्रक्रिया में मंजूरी का काम पूरा किया जा रहा है। इन टर्मिनलों के माध्यम से रेलवे को सड़क, रेल और अन्य परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।







