राष्ट्रीय ( नितिन ) : बेंगलुरु के पास बिदादी में चल रही एक अवैध फ़ैक्टरी से फ़ूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 5 करोड़ रुपये से ज़्यादा की नकली और घटिया दवाएं जब्त की हैं। जांच में सामने आया कि यह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बिना किसी वैध लाइसेंस के चल रही थी, जहां नकली और घटिया दवाओं की रीपैकेजिंग कर उन पर नामी MNC फार्मास्युटिकल कंपनियों के ब्रांडेड लेबल लगाए जा रहे थे।
अधिकारियों के मुताबिक, इस रैकेट में देश के अलग-अलग हिस्सों में गैर-कानूनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से दवाएं मंगवाना, उनकी रीपैकेजिंग करना और उन्हें बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों के नाम से बेचना शामिल था। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने इस ऑपरेशन को ड्रग माफिया का एक बड़ा मामला बताया और कहा कि नकली दवाएं कथित तौर पर अस्पतालों को बाजार भाव से लगभग 50 प्रतिशत कम कीमत पर बेची जा रही थीं।
खादर ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि ज़ब्त की गई कुछ दवाएं कथित तौर पर इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में इस्तेमाल के लिए थीं। आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जबकि रामनगर के पुलिस अधीक्षक ने जांच का जिम्मा संभाल लिया है। अधिकारी अब पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रहे हैं, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने बिदादी यूनिट को दवाएं सप्लाई कीं और जिन्होंने उन्हें खरीदा हो सकता है।
खादर ने यह भी कहा कि यह रैकेट कर्नाटक से बाहर भी फैला हो सकता है, जिससे पूरे भारत में नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क की संभावना का संकेत मिलता है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि जिस व्यक्ति ने छापेमारी के लिए जानकारी दी थी, उसे इनाम दिया जाएगा। यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार फ़ूड और ड्रग सेफ़्टी के नियमों के उल्लंघन के ख़िलाफ़ सख़्ती बढ़ा रही है और साथ ही फ़ार्मास्युटिकल सप्लाई चेन पर भी नज़र रख रही है।
सख़्ती का दायरा बढ़ा
हाल के हफ़्तों में FSDA ने फ़ूड से जुड़ी जगहों के अलग-अलग हिस्सों में निरीक्षण तेज़ कर दिया है। फ़ूड सेफ़्टी अभियान के तहत, निरीक्षण अब सड़क किनारे बने खाने-पीने के ठिकानों से आगे बढ़कर थ्री-स्टार और फ़ाइव-स्टार होटलों, इंटरनेशनल फ़ूड चेन, सरकारी कैंटीन, इंदिरा कैंटीन और क्विक-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को सामान सप्लाई करने वाले गोदामों तक पहुंच गया है।
ग्राहकों के लिए शिकायत करने का तरीका
राज्य सरकार ने खाने और दवाओं की सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायत करने में ग्राहकों को सीधे तौर पर शामिल करने की कोशिश भी की है। फ़ार्मेसी, रेस्टोरेंट और खाने-पीने की दूसरी जगहों पर QR कोड लगाए जाएंगे, जिनके ज़रिए ग्राहक खाने और दवाओं की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। नकली और घटिया दवाओं के मामले में यह कदम बहुत अहम है, क्योंकि ऐसे मामलों में ग्राहक सिर्फ़ पैकेजिंग देखकर उत्पाद की असलियत का पता नहीं लगा पाते हैं।









