नई दिल्ली ( नितिन ) : पिछले सप्ताह फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक A320 फ्लाइट अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गई। इस दौरान विमान में कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिनमें हाइड्रोलिक सिस्टम की तीन बार खराबी और ऑटोपायलट का डिस्कनेक्ट होना शामिल है। घटना में कम से कम 17 यात्री और क्रू सदस्य घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, एयरबस A320 विमान VT-EXO से संचालित फ्लाइट AI2379 ने 4 अगस्त को फुकेत से उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने के बाद को-पायलट ने विमान का कंट्रोल संभाला। इसके तुरंत बाद कॉकपिट में ‘फ्लाइट-कंट्रोल स्टॉल’ का संदेश दिखाई दिया।
उड़ान के दौरान टर्बुलेंस के साथ कई अन्य तकनीकी और मैकेनिकल समस्याएं भी सामने आईं। कुछ इंडिकेटर और स्विच थोड़े समय के लिए काम करना बंद कर गए। विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम में भी खराबी दर्ज की गई। हाइड्रोलिक सिस्टम विमान के फ्लाइट कंट्रोल सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जरूरी होता है। जांचकर्ता अब इन तकनीकी गड़बड़ियों के क्रम और उनके बीच संभावित संबंधों की जांच कर रहे हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या इनमें से किसी खराबी का संबंध विमान की अचानक ऊंचाई कम होने की घटना से था।
क्रू ने कुछ समय बाद विमान को स्थिर किया और दिल्ली के लिए उड़ान जारी रखी। विमान में 137 यात्री, जिनमें तीन शिशु शामिल थे, और आठ क्रू सदस्य-दो पायलट और छह केबिन क्रू-सवार थे। घटना में कम से कम 17 लोग घायल हुए, जिनमें चार केबिन क्रू सदस्य भी शामिल हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने पहले बताया था कि टर्बुलेंस करीब पांच मिनट तक रही। कुछ क्रू सदस्यों को रीढ़ और गर्दन में चोटें आईं और उन्हें चिकित्सा उपचार की जरूरत पड़ी।
AAIB कर रहा है घटना की जांच
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने इस घटना को ‘गंभीर घटना’ (serious incident) माना है। इसकी जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। जांच इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के एनेक्स 13 के तहत की जा रही है। इसके तहत विमान दुर्घटनाओं और गंभीर घटनाओं की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया निर्धारित है। जांच में एयरबस और फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA से भी तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है। फ्रांस की भागीदारी इसलिए है क्योंकि A320 विमान बनाने वाली कंपनी एयरबस का मुख्यालय फ्रांस में है।
एयरबस ने कहा है कि वह संबंधित जांच अधिकारियों को तकनीकी सहायता दे रही है और जांच में मदद के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेज रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह एयर इंडिया को सक्रिय रूप से सहयोग दे रही है। जांचकर्ता विमान के सिस्टम, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर सहित उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि विमान की अचानक ऊंचाई कम होने की वजह क्या थी और रिपोर्ट की गई तकनीकी खराबियां किस क्रम में हुईं।
यात्रियों ने बताया- अचानक नीचे गिरने जैसा महसूस हुआ
एक यात्री ने बताया कि जब विमान की ऊंचाई अचानक कम होने लगी, तो उसने तुरंत अपने पोते को पकड़ा और उसकी सीटबेल्ट बांध दी। उसने दावा किया कि इस घटना के दौरान उसकी पसलियों में चोट आई, जबकि एक अन्य छोटा बच्चा विमान के पिछले हिस्से की ओर उछलकर गिर गया। यात्रियों के ये बयान घटना से जुड़ी जानकारी का हिस्सा हैं, लेकिन इनसे स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं चला है कि ऊंचाई कम होने का कारण क्या था।
पायलट के शुरुआती टेस्ट पर भी जांच
घटना के बाद दोनों पायलटों की अनिवार्य साइकोएक्टिव पदार्थों की स्क्रीनिंग की गई थी। एयर इंडिया ने पहले कहा था कि वह नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार क्रू सदस्यों की नियमित ड्रग टेस्टिंग करती है और अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेगी। DGCA ने कहा कि दोनों पायलटों की निर्धारित स्क्रीनिंग की गई, लेकिन पायलट-इन-कमांड के शुरुआती टेस्ट का नतीजा ऐसा था जिसके लिए और जांच की ज़रूरत थी। सैंपल को कन्फर्मेटरी टेस्टिंग के लिए एक तय लैब में भेजा गया है और अंतिम रिपोर्ट का इंतज़ार है। अहम बात यह है कि शुरुआती नतीजे से यह साबित नहीं होता कि पायलट ड्रग्स के इस्तेमाल के लिए पॉजिटिव पाया गया है। कन्फर्मेटरी टेस्ट और AAIB की जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। आगे की कार्रवाई दोनों प्रक्रियाओं के नतीजों पर निर्भर करेगी।






