इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में व्हाइट डॉल्फिन मीडिया हाउस द्वारा आयोजित वाटर सिम्पोजियम में मिली बड़ी उपलब्धि
संस्था ने सम्मान को बुंदेलखंड की ‘जल सहेलियों’ और ग्रामीण समुदायों के संघर्ष को किया समर्पित
झांसी (हरिमोहन श्रीवास) : जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में बुंदेलखंड का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चमका है। नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में व्हाइट डॉल्फिन मीडिया हाउस द्वारा आयोजित एक भव्य वाटर सिम्पोजियम (जल संगोष्ठी) में झांसी की अग्रणी स्वयंसेवी संस्था ‘परमार्थ समाज सेवी संस्थान’ को प्रतिष्ठित “वाटर एक्सीलेंस अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।संस्था को यह राष्ट्रीय सम्मान जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे निरंतर और उल्लेखनीय कार्यों, पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार तथा पानी बचाने के अभियान में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को अभूतपूर्व तरीके से बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया है।
कार्यक्रम में देश के कई जाने-माने जल विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मंच पर मुख्य रूप से भारत के “जल पुरुष” के नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह, कोल इंडिया के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, परमार्थ संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राणा प्रताप तथा बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कोल इंडिया के महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी और देश भर से आए पर्यावरणविद भी मौजूद थे।

सिम्पोजियम के दौरान कोल इंडिया द्वारा जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे एक अनूठे प्रयास “कोल नीर” को भी देश के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके तहत कोयला खनन के दौरान निकलने वाले उस पानी को, जिसे पहले बेकार समझकर बाहर बहा दिया जाता था, अब आधुनिक तकनीक से उपचारित (ट्रीट) कर पीने योग्य पानी के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। विशेषज्ञों ने इसे जल संकट से निपटने के लिए एक सराहनीय और क्रांतिकारी कदम बताया है।
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद परमार्थ संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह सम्मान केवल संस्था का नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड का गौरव है। उन्होंने इस सफलता का पूरा श्रेय ‘परमार्थ परिवार’, गांव-गांव में पानी के लिए संघर्ष कर रही ‘जल सहेलियों’ और उन सभी ग्रामीण समुदायों के भगीरथ प्रयासों को समर्पित किया, जो भीषण जल संकट के बीच जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए दिन-रात धरातल पर पसीना बहा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विशेषज्ञों ने एक सुर में संदेश दिया कि “जल है तो जीवन है, और जल संरक्षण ही हमारे सुरक्षित भविष्य का एकमात्र आधार है।”












