पंजाब नितिन : भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पंजाब दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी को पंजाब की धरती पर कदम रखने से पहले 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों के दर्द, उनके संघर्ष और दशकों से लंबित न्याय के सवालों का जवाब देना चाहिए। पंजाब केवल राजनीतिक भाषणों और चुनावी यात्राओं से प्रभावित होने वाला प्रदेश नहीं है। यहां के लोगों की स्मृतियों में 1984 का वह काला अध्याय आज भी जीवित है, जब निर्दोष सिखों को निशाना बनाया गया और हजारों परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
चुघ ने कहा कि 1984 में सिखों के खिलाफ हुई हिंसा केवल एक दंगा नहीं, बल्कि देश के इतिहास का एक अत्यंत दर्दनाक अध्याय है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, जिन महिलाओं ने अपने पति और बच्चों को खोया और जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, उनके लिए न्याय आज भी एक अधूरा सपना है। ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व की जिम्मेदारी बनती है कि वे इन परिवारों के सवालों से मुंह न मोड़ें और स्पष्ट करें कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस ने वास्तव में क्या किया।
चुग ने कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व द्वारा प्रदर्शन आयोजित करना 1984 के पीड़ित परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा था। जिस तारीख को हजारों निर्दोष सिखों की हत्या और उनके परिवारों के विनाश की यादें जुड़ी हों, उस दिन राजनीतिक प्रदर्शन और शक्ति प्रदर्शन करना कांग्रेस की संवेदनहीन राजनीतिक सोच को उजागर करता है। राहुल गांधी एक तरफ मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, लेकिन क्या उन्हें उन सिख परिवारों का दर्द दिखाई नहीं देता, जिन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान हुई उस भयावह हिंसा की कीमत अपनी पूरी जिंदगी से चुकाई?
चुघ ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा सहित पंजाब कांग्रेस के सभी नेताओं को राहुल गांधी का स्वागत करने से पहले 1984 के सिख कत्लेआम पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि क्या वे 1984 के पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और क्या वे कांग्रेस के उस इतिहास की जवाबदेही तय करने का साहस रखते हैं, जिसमें हजारों निर्दोष सिखों की जान गई और अनगिनत परिवार उजड़ गए। पंजाब कांग्रेस के नेता केवल राजनीतिक स्वागत-सत्कार और बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के सवाल पर अपनी स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाएं।
चुघ ने राहुल गांधी से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि क्या वे अपने पंजाब दौरे के दौरान 1984 के पीड़ित परिवारों से मिलेंगे? क्या वे उनके सामने बैठकर उनकी पीड़ा सुनने और उनके लंबित सवालों का जवाब देने का साहस दिखाएंगे? क्या वे कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए स्पष्ट प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे? पंजाब को राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, जवाबदेही और न्याय चाहिए। यदि 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम किसी सरकार ने उठाए, तो उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कदम महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद लंबे समय से बंद पड़े गंभीर मामलों की जांच और पुनः जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
2014 में केंद्र सरकार ने प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को अतिरिक्त पांच लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय भी लिया। चुग ने कहा कि हजारों पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए तथा भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने भी पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के लिए कदम उठाए। दूसरी ओर, कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए चुग ने कहा कि पहले उसके शासनकाल में सिखों के खिलाफ भयावह हिंसा हुई और उसके बाद दशकों तक पीड़ित परिवार न्याय के लिए संघर्ष करते रहे। कांग्रेस को बताना चाहिए कि इतने वर्षों तक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी क्यों हुई और दोषियों को जवाबदेह बनाने के लिए समय पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
चुग ने कहा कि पंजाब की जनता सब याद रखती है। 1984 के पीड़ितों का दर्द किसी राजनीतिक दल के लिए चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि न्याय और मानवीय गरिमा का प्रश्न है। राहुल गांधी को समझना होगा कि पंजाब की जनता से विश्वास मांगने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास और अपने राजनीतिक आचरण का जवाब देना होगा। पीड़ित परिवारों के आंसुओं पर राजनीति नहीं, उन्हें न्याय मिलना चाहिए।






