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पंजाब में तीन ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी अब मौके पर नहीं होगा चालान का निपटारा कोर्ट जाना होगा, पढ़िए नए नियम

On: June 26, 2026 5:23 AM
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पंजाब में सड़क पर रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव और रॉंग साइड ड्राइविंग पर सरकार ने शक्ति करना शुरू कर दी है। पंजाब सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने के इन तीन मामलों को नॉन कंपाउंडेबल कैटेगरी में शामिल कर दिया है। इस कैटेगरी में अगर अब आपका चालान होता है तो उसका भुगतान न तो आप मौके पर कर सकेंगे और ना ही आरटीओ दफ्तर में जाकर चालान का भुगतान होगा इन मामलों में फंसे लोगों को कोर्ट के चक्कर काटने होंगे और मजिस्ट्रेट के सामने ही चालान का फैसला होगा।

खास बात यह है कि कोर्ट में चालान की सुनवाई के दौरान अगर मामला ज्यादा गंभीर हुआ तो कोर्ट ड्राइवर को एक्ट के अनुसार कानूनी सजा भी सुना सकता है। राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया की हरी झंडी के बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सचिव वरुण रूजूम ने इस आदेश को पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। सचिव ने अपने आदेशों में कहा है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद के ऐसे चलानो का फैसला पुलिस और आरटीओ अपने स्तर पर ना करवाए सरकार ने यह नोटिफिकेशन 17 जून को जारी किया और अब आरटीओ व पुलिस को भेजा गया है।

इन तीन मामलों पर पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या हुआ है जानिए

कंपाउंडटेबल कैटेगरी में थे तीन मामले जानिए क्या है अब तक व्यवस्था यह थी कि यदि कोई रेड लाइट जंप करते गलत दिशा में गाड़ी चलाते या शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता था तो वह कंपाउंडेबल कैटेगरी में आता था इसका मतलब था कि आप मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस अधिकारी या फिर अपने नजदीकी आरटीओ में जाकर सरकार द्वारा तय की गई जुर्माना राशि नगद या ऑनलाइन जमा कर देते थे जुर्माना भरते ही आपका चालान वही बंद हो जाता था और आपको कोर्ट जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती थी।

नोंन कंपाउंडेबल कैटेगरी में शामिल

सरकार ने नई नोटिफिकेशन के बाद अब तीन कैटेगरी रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव और रॉंग साइड ड्राइविंग के चलानो को कंपाउंडेबल अपराधों में अपराधों की सूची से बाहर कर दिया गया है। अब पुलिस या परिवहन विभाग के पास यह अधिकार ही नहीं बचा है कि वह पैसे लेकर चालान को बंद करवा दें। अब जैसे ही कोई इन नियमों का उल्लंघन करेगा पुलिस वाहन जब्द कर सकती है या दस्तावेज ले सकती है लेकिन उसका निपटारा केवल और केवल कोर्ट के माध्यम से ही होगा कोर्ट के सम्बन आएंगे मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना होगा अपना पक्ष रखना होगा और जज तय करेंगे की कितनी सजा दी जाए या कितना जुर्माना लगाया जाए।

सरकार को क्यों लेना पड़ा यह बेहद सख्त फैसला।

कानून का डर खत्म होना इसका एक बहुत बड़ा कारण है आपको बता दें ट्रैफिक एक्सपर्ट एवं रिटायर्ड एसपी ट्रैफिक गुरदेव सिंह का कहना है कि सड़क पर ड्राइव करते समय लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं ट्रैफिक पुलिस उनका चालान करती है तो वह मौके पर ही उसका भुगतान करके आगे निकल जाते हैं। इससे उनका कानून का कोई डर नहीं रहता है उन्होंने यह भी कहा कि जानलेवा स्टंट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग भी एक बड़ा कारण है हाल के दिनों में पंजाब के प्रमुख शहरों जैसे लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और मोहाली में रॉन्ग साइड गाड़ी चलाने और सोशल मीडिया रील के लिए खतरनाक स्टंट का चलन बहुत तेजी से बढ़ गया था। पुलिस ने ऐसे मामलों में कई लोगों के चालान भी किए लेकिन ऐसी हरकतें बंद नहीं हो रही अब अगर ऐसे मामले कोर्ट में जाएंगे तो वहां पर उससे जवाब तलब भी होगा और सजा भी मिल सकती है। यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि रॉंग साइड ड्राइविंग के कारण हो रहे बहुत ज्यादा एक्सीडेंट उन्होंने बताया शहर में अक्सर लोग अपने बच्चों को विकल दे देते हैं और उसके बाद वह सड़कों पर रैश ड्राइविंग करते हैं इसके चलते आए दिन दुर्घटना हो रही हैं इन घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने उनके चालान भुगतान की प्रक्रिया को थोड़ा मुश्किल किया है कोर्ट में ऐसे मामलों के संभन आने पर माता-पिता को पेश होना पड़ेगा और कोर्ट उन्हें फटकार लगाएगी उसके बाद वह अपने बच्चों को विकल नहीं देंगे।

ड्रंक एंड ड्राइव का बढ़ता ग्राफ वीकेंड पर देर रात होने वाले अधिकांश जानलेवा हाथों में ड्राइवर के शराब के नशे में होने की पुष्टि होती है मौके पर जुर्माना देकर छूट जाने की सहूलियत के कारण लोग बार-बार यह गलती दोहरा रहे थे। यही नहीं कोर्ट में पेश होने के डर से करेंगे अब नियमों का पालन जब लोगों को चालान का भुगतान करने के लिए कोर्ट में जाना पड़ेगा तो उन्हें वहां वकीलों की फीस के साथ कानूनी सजा होने का भी डर रहेगा क्योंकि इन मामलों में कानूनी सजा का भी प्रावधान है।

किन-किन धाराओं के तहत बदला नियम कितनी होगी सजा जानिए

धारा 184 खतरनाक तरीके से वाहन चलाना
नोटिफिकेशन के मुताबिक अगर कोई भी व्यक्ति ऐसी लापरवाही से गाड़ी चलाता है तो एक सामान्य और सतर्क ड्राइवर की कैटेगरी में से बहुत नीचे है तो उसे कोर्ट का सामना करना पड़ेगा। इसमें मुख्य रूप से ट्रैफिक सिग्नल को नजरअंदाज कर गाड़ी तेजी से निकलना सड़कों पर बने स्टॉप के बोर्ड या जेब्रा क्रॉसिंग के नियमों को तोड़ना शॉर्टकट के चक्कर में रॉन्ग साइड गाड़ी चलाना ऐसी ड्राइविंग जिससे स्पष्ट रूप से दिखे कि इससे दूसरों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है को शामिल किया गया है।

सजा का प्रावधान, अब आपको बताते हैं कि ऐसे मामलों में क्या है सजा का प्रावधान जानिए धारा 184 के तहत पहली बार पकड़े जाने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या 1000 से 5000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है यदि कोई व्यक्ति 3 साल के भीतर दोबारा यही गलती करता पकड़ा जाता है तो उसे 2 साल तक की जेल और ₹10000 तक का जुर्माना भुगतान करना पड़ सकता है इसके साथ ही कोर्ट ड्राइवर का लाइसेंस भी रद्द कर सकती है।

धारा 185 और 188 शराब या ड्रग्स के नशे में गाड़ी चलाना

नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है धारा 185 के तहत वह ड्राइवर आता है जो खुद शराब पीकर गाड़ी चला रहा हो और जिसके 100 मिलीमीटर रक्त में 30 मिलीग्राम से अधिक अल्कोहल पाया जाए धारा 188 बेहद महत्वपूर्ण है अगर आप खुद गाड़ी नहीं चला रहे हैं लेकिन आप गाड़ी के मालिक हैं और आपने जानबूझकर किसी ऐसे व्यक्ति को गाड़ी सौंप दी जो नशे में है या आप नशे में दुत्त ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठकर उसे बढ़ावा दे रहे हैं तो आप भी उतने ही दोषी माने जाएंगे।

सजा का प्रावधान
ड्रिंक एंड ड्राइव के मामले में पहली बार पकड़े जाने पर 6 महीने तक की जेल और ₹10000 तक का जुर्माना अगर कोर्ट में दूसरी बार यह मामला पहुंचता है तो जुर्माना बढ़कर 15000 हो जाएगा और जेल की सजा दो साल तक बढ़ाई जा सकती है।

धारा 199 ए अंडरेज ड्राइविंग
यदि उम्र 18 वर्ष से कम है और सड़क पर कर बाइक या स्कूटी दौड़ते हुए पकड़े जाते हैं तो सरकार के नए नियम, चलाने वाले और उसके माता-पिता दोनों के लिए मुसीबत खड़ी कर देगा इस धारा के तहत पूरी जिम्मेदारी नाबालिक के अभिभावकों पर डाली गई है। जानिए क्या है इसमें सजा का प्रावधान इस मामले के लिए कोर्ट सीधे नाबालिक के माता-पिता या वाहन के मालिक को दोषी मानता है इसमें ₹25000 जुर्माना और 3 साल तक की जेल का प्रावधान है इसके अलावा उस वाहन का रजिस्ट्रेशन आरसी पूरे 12 महीने के लिए रद्द कर दी जाएगी। नियम तोड़ने वाले नाबालिक का 25 वर्ष की उम्र होने तक ड्राइविंग लाइसेंस डीएल नहीं बन सकेगा। नाबालिक के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट डबल के एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।

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