नेशनल डेस्क :नितिन : नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों और किसान संगठनों ने बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द करने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के आह्वान को समर्थन दिया है। दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव और अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार कमजोर हो रहे हैं। वक्ताओं ने छात्रों, युवाओं, किसानों और नागरिक समाज के सदस्यों से 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।
भूषण ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया ने गरीब और वंचित वर्गों को असमान रूप से प्रभावित किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) की पूर्व अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कहा कि देश “दूसरे स्वतंत्रता संग्राम” का सामना कर रहा है और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन में किसान संगठन भाग लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा समाज के सभी वर्गों से संबंधित है।
एसआईआर और सीईसी के खिलाफ 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को नागरिक समाज, किसान संगठनों का समर्थन नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों और किसान संगठनों ने बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द करने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के आह्वान को समर्थन दिया है।
दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव और अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार कमजोर हो रहे हैं। वक्ताओं ने छात्रों, युवाओं, किसानों और नागरिक समाज के सदस्यों से 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। भूषण ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया ने गरीब और वंचित वर्गों को असमान रूप से प्रभावित किया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) की पूर्व अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कहा कि देश “दूसरे स्वतंत्रता संग्राम” का सामना कर रहा है और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन में किसान संगठन भाग लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा समाज के सभी वर्गों से संबंधित है।
SIR और CEC के खिलाफ 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को नागरिक समाज, किसान संगठनों का समर्थन







