लखनऊ: सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, उत्तर प्रदेश माला श्रीवास्तव ने अवगत कराया है कि प्रदेश के जनपद महोबा के हरपालपुर-महोबकान्त क्षेत्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), उत्तरी क्षेत्र, लखनऊ द्वारा जिरकोनियम खनिज की प्रारम्भिक खोज की गई । इसके गहन अन्वेषण के लिए खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा क्रिटिकल एवं स्ट्रेटिजिक मिनरल के अंतर्गत एक्सप्लोरेशन लाइसेंस हेतु राष्ट्रीय स्तर पर निविदा (एनआईटी) आमंत्रित की गई थी।
उन्होंने बताया कि उक्त प्रक्रिया में मैसर्स माहेश्वरी माइनिंग प्रा. लि., पश्चिम बंगाल द्वारा सर्वाधिक बोली लगाए जाने के उपरान्त उसे प्रिफर्ड बिडर घोषित किया गया है। इस ब्लॉक के आक्शन के बाद उत्तर प्रदेश में जिरकोनियम खनिज के भण्डारों की स्थापना एवं आगे के अन्वेषण कार्यों को नई गति मिलेगी।
माला श्रीवास्तव ने बताया कि जिरकोनियम एक महत्वपूर्ण क्रिटिकल एवं स्ट्रेटिजिक मिनरल है, जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, रासायनिक उद्योगों, आभूषण एवं रत्न उद्योग तथा दंत चिकित्सा क्षेत्र सहित अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। प्रदेश में इस खनिज की उपलब्धता भविष्य में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जिरकोनियम खनिज की उपलब्धता इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे खनन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा राज्य सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी।
साथ ही क्षेत्र में नए निवेश की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मुख्य खनिजों के कुल 13 ब्लॉकों का आक्शन किया गया है, जिसमें 10 ब्लॉक कम्पोजिट लाइसेंस तथा 03 ब्लॉक खनन पट्टे के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इन सभी ब्लॉकों में शीघ्र खनन संचालन प्रारंभ किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं सतत उपयोग के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पहली बार जिरकोनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज का पाया जाना उत्तर प्रदेश के खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।










