मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने जलकल विभाग, नगर निगम की कार्यशैली को लेकर लगाई फटकार.

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  • मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने जलकल विभाग नगर निगम ऐशबाग कार्यालय का किया औचक निरीक्षण, लापरवाही पर जताई कड़ी नाराजगी
  • उपस्थिति एवं कार्यालयीय अनुशासन की गहन जांच, भ्रमण पंजिका तत्काल संचालित करने के निर्देश
  • शिकायत निस्तारण व्यवस्था की समीक्षा में मिली भारी पेंडेंसी, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश
  • शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर परखी जमीनी हकीकत, फर्जी निस्तारण पर चेतावनी
  • नकारात्मक समाचारों पर तत्काल कार्रवाई एवं शिकायतों की वॉइस रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश
  • री-ओपन जनशिकायतों का स्थलीय सत्यापन एवं निस्तारण की वास्तविक स्थिति का परीक्षण
  • सीवर व्यवस्था एवं मेनहोलों की दुर्दशा पर कड़ी नाराजगी, तत्काल सुधार के निर्देश

लखनऊ : मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत द्वारा जलकल विभाग, नगर निगम ऐशबाग स्थित महाप्रबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सर्वप्रथम कार्यालय के उपस्थिति पंजिका एवं अवकाश पंजिका का विस्तृत अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि अनुपस्थित कर्मचारियों को नियमित रूप से सीएल अंकित कर दिया जाता है। मण्डलायुक्त ने 05 जून की उपस्थिति पंजिका का परीक्षण करते हुए उस दिन अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। अवगत कराया गया कि दो कर्मचारियों के विलंब से कार्यालय आने तथा एक कर्मचारी के बिना पूर्व सूचना आधे दिन तक अनुपस्थित रहने पर उन्हें सीएल स्वीकृत कर दी गई थी। इस पर मण्डलायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अनुशासनहीनता एवं अनधिकृत अनुपस्थिति के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा जवाबदेही तय की जाए। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कार्यालय में कर्मचारियों के भ्रमण एवं क्षेत्रीय निरीक्षणों का कोई पृथक अभिलेख उपलब्ध नहीं है। इस पर मण्डलायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए महाप्रबंधक जलकल को तत्काल भ्रमण पंजिका संचालित करने के निर्देश दिए, जिसमें प्रत्येक कर्मचारी के कार्यालय से बाहर जाने का उद्देश्य, स्थान, समय एवं कार्य का स्पष्ट अंकन किया जाए, जिससे कार्यों की निगरानी एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो सके।

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इसके उपरान्त मण्डलायुक्त द्वारा जलकल विभाग के कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया गया। उन्होंने पोर्टल, दूरभाष एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रगति का गहन परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दिनांक 10 जून 2026 तक दूरभाष के माध्यम से प्राप्त 7 दिन से अधिक 232 शिकायतें लम्बित/डिफाॅल्टर की श्रेणी में पाई गई। इनमें सबसे पुरानी शिकायत 01 फरवरी 2025 की है तथा 6 शिकायतें 2025 से लम्बित है। इसके अतिरिक्त नगर निगम से प्राप्त 847 लम्बित शिकायतों में 357 शिकायतें 07 दिन से अधिक लम्बित पाई गई। निरीक्षण में पाया गया कि योगेश सिंह जोनल मैनेजर SUEZ INDIA के स्तर पर दूरभाष के माध्यम से प्राप्त 110 शिकायतें लम्बित है जिनमें से 31 री-ओपन शिकायतें पाई गई। इसी प्रकार डी0बी0 सिंह जे0ई0 के स्तर से दूरभाष के माध्यम से प्राप्त 52 शिकायतें लम्बित है जिनमें से 21 री-ओपन शिकायतें पाई गई। मण्डलायुक्त ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत का निस्तारण निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल शिकायत बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने शिकायत निस्तारण प्रणाली की नियमित माॅनिटरिंग एवं दैनिक समीक्षा करने के भी निर्देश दिए।

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निरीक्षण के दौरान मण्डलायुक्त ने समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों में प्रकाशित जलकल विभाग से संबंधित नकारात्मक समाचारों की भी समीक्षा की। उन्होंने महाप्रबंधक जलकल को निर्देशित किया कि सभी नकारात्मक समाचारों का तत्काल संज्ञान लेते हुए तथ्यों की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों के संबंध में प्राप्त दूरभाषीय संवादों की वॉइस रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए, जिससे शिकायतों की गुणवत्ता, निस्तारण की प्रक्रिया तथा शिकायतकर्ता की संतुष्टि का समय-समय पर परीक्षण किया जा सके। उन्होंने कहा कि शिकायत निस्तारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं नागरिक हितैषी बनाने के लिए तकनीकी साधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।

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मण्डलायुक्त द्वारा री-ओपन शिकायतों का भी विस्तृत परीक्षण किया गया। उन्होंने उन शिकायतों की विशेष समीक्षा की जो एक ही कार्य के संबंध में दो या तीन बार से अधिक प्राप्त हुई थीं। उन्होंने कंट्रोल रूम से ही कुछ शिकायतकर्ताओं से दूरभाष पर सीधे संवाद स्थापित कर उनकी शिकायतों के निस्तारण की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई मामलों में शिकायतों का निस्तारण संतोषजनक नहीं था तथा कुछ शिकायतों में कार्य अधूरा रहने के बावजूद उन्हें निस्तारित दर्शा दिया गया था। इस पर मण्डलायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी शिकायत का फर्जी अथवा कागजी निस्तारण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिकायतों का समाधान गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं स्थायी होना चाहिए तथा शिकायतकर्ता की संतुष्टि को निस्तारण का प्रमुख आधार बनाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि लापरवाही अथवा गलत आख्या प्रस्तुत करने वाले कार्मिकों के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसके उपरांत मण्डलायुक्त द्वारा जनशिकायतों के निस्तारण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से री-ओपन शिकायतों का गहन परीक्षण किया गया। इसी क्रम में मण्डलायुक्त स्वयं शिकायतकर्ता के मूल निवास स्थान, केंद्रीय भवन रोड सेक्टर-एच, अलीगंज पहुंचे तथा संबंधित शिकायत के निस्तारण का स्थलीय सत्यापन किया। उन्होंने शिकायतकर्ता से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर निस्तारण की गुणवत्ता, विभागीय कार्रवाई तथा समस्या के समाधान की वास्तविक स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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स्थलीय निरीक्षण के दौरान मण्डलायुक्त द्वारा केंद्रीय भवन रोड सेक्टर-एच, अलीगंज स्थित सड़क पर बने विभिन्न मेनहोलों के ढक्कन खुलवाकर सीवर व्यवस्था की जांच की गई। निरीक्षण में पाया गया कि संबंधित क्षेत्र की सीवर लाइन पूर्णतः चोक अवस्था में है, जिसके कारण आगामी वर्षा ऋतु में सीवर का पानी मेनहोलों से बाहर निकलकर सड़कों पर फैलने की गंभीर संभावना है। इस स्थिति पर मण्डलायुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे विभागीय लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कई स्थानों पर मेनहोल के ढक्कन क्षतिग्रस्त, जर्जर एवं टूटी हुई अवस्था में हैं, जिससे आमजन, विशेषकर रात्रि के समय आवागमन करने वाले नागरिकों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। इस पर मण्डलायुक्त ने महाप्रबंधक जलकल को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि समस्त चोक सीवर लाइनों की विशेष अभियान चलाकर तत्काल सफाई कराई जाए तथा सभी क्षतिग्रस्त मेनहोल ढक्कनों को निर्धारित समयसीमा में बदलना सुनिश्चित किया जाए।

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उन्होंने निर्देशित किया कि क्षेत्रवार सर्वेक्षण कर ऐसे सभी संवेदनशील स्थलों की सूची तैयार की जाए जहां सीवर ओवरफ्लो अथवा मेनहोल क्षतिग्रस्त होने की समस्या है। इन स्थलों पर प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए तथा की गई कार्रवाई की फोटोग्राफ सहित आख्या निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत की जाए। मण्डलायुक्त ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वर्षा ऋतु के दौरान सीवर ओवरफ्लो, जलभराव अथवा क्षतिग्रस्त मेनहोलों के कारण किसी प्रकार की जनहानि अथवा दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न होती है तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही निर्धारित करते हुए उनके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

अंत में मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कहा कि जलकल विभाग नागरिकों से सीधे जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण जनसेवा संस्था है, अतः विभाग के प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्देशित किया कि जनशिकायतों के निस्तारण, सीवर एवं जलापूर्ति व्यवस्थाओं के रखरखाव, कार्यालयीय अनुशासन तथा फील्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता अथवा शिकायतों के फर्जी निस्तारण को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारी जनसमस्याओं के त्वरित, गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा प्रत्येक शिकायतकर्ता को यह अनुभव होना चाहिए कि शासन एवं प्रशासन उसकी समस्या के समाधान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि वर्षा ऋतु के दृष्टिगत सीवर, जलनिकासी एवं सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित सभी संवेदनशील बिंदुओं पर विशेष सतर्कता बरती जाए तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक सुधारात्मक कार्य पूर्ण कर उनकी अनुपालन आख्या प्रस्तुत की जाए।

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