तरनतारन अमृतसर (नितिन): सिविल अस्पताल पट्टी में स्वास्थ्य विभाग की कथित फर्जी आईडी तैयार कर कर्मचारियों के वेतन के नाम पर सरकारी खजाने से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि की हेराफेरी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में सिविल अस्पताल पट्टी के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. आशीष गुप्ता की शिकायत के आधार पर थाना सिटी पट्टी पुलिस ने अस्पताल में तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर गुरिंदर पाल सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। दूसरी ओर इस बड़े कथित घोटाले के सामने आने से अस्पताल के वित्तीय प्रबंधन, वेतन संबंधी बिलों की जांच और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 के दौरान सिविल अस्पताल पट्टी में एक निजी कंपनी के माध्यम से ठेका प्रणाली के तहत करीब एक दर्जन कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इनमें ईसीजी टेक्नीशियन, प्रशिक्षित दाइयों और कंप्यूटर ऑपरेटरों सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। इसी के तहत अगस्त 2018 से गार्डन कॉलोनी पट्टी निवासी गुरिंदर पाल सिंह अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर कार्यरत था।
जुलाई 2022 के दौरान उक्त कर्मचारी ने कथित तौर पर किसी की सहायता से स्वास्थ्य विभाग की एक फर्जी आईडी तैयार करवा ली। इसके बाद इसी आईडी की मदद से कर्मचारियों के वेतन संबंधी फर्जी बिल तैयार कर सरकारी राशि की अदायगी करवाने का सिलसिला शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रही और सरकारी धन की कथित हेराफेरी के लिए तीन बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने का भी संदेह है।
हैरानी की बात यह है कि सरकारी अस्पताल में कर्मचारियों के वेतन संबंधी बिल तैयार करने, उनकी जांच करने और राशि जारी करने की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है। ऐसे में एक डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा कथित फर्जी आईडी के सहारे लंबे समय तक सरकारी धन की अदायगी करवाने का मामला सामने आने से सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत भी रही है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।











