Price Hike नितिन की खबर : आम लोगों को आने वाले दिनों में महंगाई का एक और झटका लग सकता है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई चीजों की कीमतें बढ़ने की आशंका है। साबुन, टूथपेस्ट, चॉकलेट, चाय, बिस्किट और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। इसकी मुख्य वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, महंगा कच्चा तेल और सप्लाई चेन में आ रही बाधाएं हैं। क्रिसिल, एलारा और कोटक नियो के विश्लेषकों की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कच्चे माल की कीमतों में एक साल के भीतर 74 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है और उनके मुनाफे पर भी दबाव पड़ रहा है।
इन चीजों के बढ़ सकते हैं दाम
महंगी होती उत्पादन लागत का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। एफएमसीजी कंपनियां लागत की भरपाई के लिए अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला ले सकती हैं। इससे साबुन, टूथपेस्ट, चॉकलेट, चाय, बिस्किट और कुकिंग ऑयल जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी हो सकती हैं। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी कितनी होगी, यह कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेगा।
एक साल में कितना महंगा हुआ कच्चा माल?
-क्रूड ऑयल से जुड़े कच्चे माल: 74 प्रतिशत तक महंगे
– प्लास्टिक रेजिन: 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी
– कोको: 46 प्रतिशत महंगा
– ट्रक किराया: 13 प्रतिशत बढ़ा
– थोक चीनी: 12.7 प्रतिशत महंगी
– आयातित पाम ऑयल: 10 प्रतिशत महंगा
– खाद्य तेल: 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी
– चाय: 5.6 प्रतिशत महंगी
– दूध: 4 प्रतिशत महंगा
– मक्का: 3.3 प्रतिशत महंगा
क्यों बढ़ रही है महंगाई?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को उत्पादन लागत बढ़ने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल का भाव करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। तेल महंगा होने से प्लास्टिक जैसे पेट्रोलियम आधारित उत्पादों के साथ-साथ परिवहन और पैकेजिंग की लागत भी बढ़ सकती है। अब तक कई कंपनियां पुराने स्टॉक के सहारे बढ़ती लागत का असर सीमित रखने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुराना स्टॉक खत्म होने और महंगे कच्चे माल से नए उत्पाद तैयार होने के बाद कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, कमजोर मानसून के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मांग प्रभावित होने की आशंका है। इससे कंपनियों के मुनाफे का मार्जिन 1 से 1.5 प्रतिशत तक घट सकता है। दूसरी ओर, त्योहारी सीजन के चलते शहरी बाजारों में मांग मजबूत बनी हुई है।
मोबाइल रिचार्ज पर पड़ेगा असर
महंगाई का असर सिर्फ रोजमर्रा की वस्तुओं तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। मोबाइल इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को भी ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां दिसंबर 2026 तक मोबाइल टैरिफ में 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसके अलावा, अगले 10 वर्षों में हर दो साल पर मोबाइल सेवाओं की कीमतों में करीब 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, ये संभावित बढ़ोतरी के अनुमान हैं और वास्तविक कीमतें टेलीकॉम कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेंगी।









