पंजाब मे परविंद्र झोटा हत्याकांड में CBI की FIR न्याय की दिशा में बड़ा कदम : तरुण चुघ

On: October 22, 2026 10:09 AM
हमें फॉलो करें:

ad copy

पंजाब नितिन :  भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने पंजाब में नशे के कारोबार, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर हो रहे हमलों और नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के मामलों को लेकर भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे का संकट अब केवल युवाओं की जिंदगी बर्बाद होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और उनके परिवारों को भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। एक तरफ सरकार नशा खत्म करने के दावे करती है, दूसरी तरफ ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

चुग ने कहा कि मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया है। झोटा जी कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। अब CBI द्वारा इस मामले में FIR दर्ज किया जाना न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके परिवार ने न्याय के लिए संघर्ष किया और स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़ा रहा। अब जरूरी है कि हत्या की पूरी साजिश और सभी आरोपियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों को कड़ी सजा मिले।

उन्होंने कहा कि संगरूर के गुलजार सिंह का मामला भी पंजाब की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अपने बेटे की नशे की लत और गांव में नशीले पदार्थों की कथित उपलब्धता को लेकर चिंता जताने वाले गुलजार सिंह की मौत ने एक परिवार को तबाह कर दिया। उनके परिवार ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने नशे का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। किसी परिवार को अपने बच्चे को नशे से बचाने की कोशिश में खुद इस तरह की त्रासदी का सामना नहीं करना चाहिए।

चुग ने कहा कि गुरदासपुर जिले के मरी पनवां गांव में बिक्रमजीत सिंह की हत्या का मामला भी बेहद गंभीर है। परिजनों के आरोपों के अनुसार, यह हमला नशे के कारोबार का विरोध करने से जुड़ा था। यदि नशे के खिलाफ खड़े होने वाले लोगों पर इस तरह हमले होते हैं, तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। इन मामलों में केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को हर तथ्य सामने लाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

उन्होंने कहा कि सितंबर में संगरूर के शेरों गांव में मोहंजीत सिंह द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान नशे की उपलब्धता के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उनके साथ कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। वहीं, अमृतसर के अजनाला क्षेत्र के सुल्तान महल गांव में 17 वर्षीय प्रभजोत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिवार ने नशीली दवाओं के सेवन और गांव में खुलेआम नशा बिकने की आशंका जताई। इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए हर आरोप की जांच और युवाओं तक नशीले पदार्थों की पहुंच रोकने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।

चुग ने जालंधर में 13 अक्टूबर को आनंद मेडिकल स्टोर और प्रभजोत मेडिकल स्टोर पर पुलिस तथा औषधि विभाग की छापेमारी का भी उल्लेख किया। इस कार्रवाई में 100 से अधिक नशीली गोलियां बरामद होने और पिता-पुत्र को कथित अवैध बिक्री के मामले में हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। उन्होंने सवाल किया कि यदि मेडिकल स्टोरों के माध्यम से प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री के मामले सामने आ रहे हैं, तो दवा लाइसेंसों की निगरानी, औषधि विभाग की जवाबदेही और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई की नियमित समीक्षा क्यों नहीं होनी चाहिए?

तरुण चुग ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परविंद्र झोटा, गुलजार सिंह और बिक्रमजीत सिंह के परिवारों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिया है। केंद्र सरकार द्वारा इन मामलों में पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगा जाना भी इस विषय की गंभीरता को दर्शाता है। अब भगवंत मान सरकार को जवाब देना होगा कि नशे के खिलाफ उसकी लड़ाई जमीन पर कहां दिखाई दे रही है, नशे की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

फेसबुक से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

Leave a Comment