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दिल्ली में प्रदर्शन पर पाबंदियों और नेताओं की हिरासत का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, आज होगी सुनवाई

On: October 11, 2026 5:09 AM
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नेशनल नितिन : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेन सेवाएं रद्द करने और विपक्षी नेताओं की प्रिवेंटिव डिटेंशन के मामले में सर्वोच्च न्यायालय रविवार (11 अक्टूबर) को विशेष सुनवाई करेगा। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ इन दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

गृह सचिव, पुलिस कमिश्नर और DMRC प्रमुख के खिलाफ अवमानना याचिका

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की अध्यक्ष डी. थारा को नामजद किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया, जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शनों के दौरान आवश्यक सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद न किया जाए। दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और ट्रेनों को रद्द करने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।

नेताओं और प्रदर्शनकारियों की रिहाई के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका में 4 पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रिवेंटिव डिटेंशन को चुनौती दी गई है। गुरुस्वामी ने अदालत में तर्क दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को दबाने के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन का उपयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सड़कों से उठाने और नेताओं को उनके घरों से हिरासत में लेने की पुलिसिया कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया था आदेश?

इससे पहले 9 अक्टूबर को सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एम. ए. बेबी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को “अतिवादी” (overreaching) करार दिया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सुरक्षा चिंताओं और आनुपातिकता (proportionality) के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए मेट्रो और रेलवे सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय नियमित व नियंत्रित ढंग से संचालित किया जाना चाहिए। अदालत ने अधिकारियों को ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए बुनियादी सुविधाओं से लैस वैकल्पिक स्थान देने का भी निर्देश दिया था।

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