भाकपा ‘बदलाव जरूरी है’ नारे के तहत राजनीतिक अभियान को और व्यापक व तेज करेगी, 28 सितंबर को पटना में करेगी लोक भवन मार्च

On: September 15, 2026 5:10 AM
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बिहार (अफजल इमाम ’’मुन्ना’’)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ.गिरीशचंद्र शर्मा और राज्य सचिव व पूर्व विधायक रामनरेश पांडेय ने रविवार को राजधानी पटना स्थित जनशक्ति भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य परिषद के निर्णयों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। भाकपा नेताओं ने राजनीतिक हस्तक्षेप को समायोचित और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के राजनीतिक मिजाज में बदलाव के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। शनिवार को राजधानी पटना में हुई राज्य परिषद की एक दिवसीय बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि आरएसएस के वैचारिक प्रभाव में चल रही मोदी सरकार जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। भाजपा सरकार में महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं। आरएसएस-भाजपा की राजनीति ने भेदभाव, हिंसा और असमानता को और गहरा किया है। न्याय, बराबरी और सम्मान के लिए अब आवाज उठानी होगी। यह सिर्फ सत्ता बदलने की बात नहीं है। यह उस व्यवस्था को बदलने की लड़ाई है जो शोषण करती है। मोदी सरकार ने किसानों और मजदूरों से किया अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया। एमएसपी की कानूनी गारंटी? किसानों की आय दोगुनी करने का वादा कहां गया? नोएडा जैसे शहरों में 10-12 हजार महीने पर काम करने वाले मजदूरों पर पुलिस लाठियां बरसा रही है। मेहनतकशों के साथ यह अत्याचार बंद होना चाहिए। भाजपा के झूठों से जनता त्रस्त हैं।

भाकपा नेताओं ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पूरे देश में 2 अक्टूबर, गांधी जयंती को सांप्रदायिक सद्भाव दिवस के रूप में मनाएगी। यह कार्यक्रम आरएसएस-भाजपा शासन के तहत बढ़ते साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और सामाजिक ताने-बाने की रक्षा करने और साम्प्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करेगा। भाकपा 7 नवम्बर को क्रांति दिवस के रुप में मनाएगी, जो दुनिया भर के मुक्ति संघर्षों व क्रांतिकारी आंदोलनों में कम्युनिस्टों की ऐतिहासिक भूमिका, जिसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक परिवर्तन में कम्युनिस्टों के योगदान भी शामिल है, को याद करता है। इस दिन का उपयोग कम्युनिस्ट आंदोलन की क्रांतिकारी और लोकतांत्रिक विरासत को लोगों के बीच, विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए किया जाएगा। साथ ही, मोदी सरकार के तहत देश के सामने मौजूद अभूतपूर्व आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए भाकपा 1 से 3 दिसम्बर को ‘बदलाव जरुरी है’ के नारे के साथ राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी। इस अभियान के दौरान राज्य की भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से वास भूमि रहित भूमिहीन परिवारों को 5 डीसमल आवासीय जमीन तथा पक्का मकान, राज्य से पलायन रोकने, किसानों के फसल की एमएसपी पर खरीदारी सुनिश्चित करने और खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने, आपराधिक घटनाओं पर रोक तथा सभी स्तरों पर व्याप्त भ्रष्टाचार सहित अन्य ज्वलंत मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

भाकपा नेताओं ने कहा कि भाकपा की राज्य परिषद् ने केंद्र की मोदी व राज्य के सम्राट सरकार की विनाशकारी तथा जनविरोधी नीतियों के खिलाफ गिरफ्तारी देने के लिए कम से कम एक लाख साथियों को संगठित करने का लक्ष्य रखा है। यह आंदोलन मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों, महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाएगा और मौलिक राजनीतिक व नीतिगत बदलाव की मांग को तेज करेगा। इसी कड़ी में बाढ़-सूखा के स्थायी निदान, केंद्र व राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों, बिहार में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार, अत्याचार और भाजपा सरकार की बुलडोजर नीति के खिलाफ जन संगठनों के आह्वान पर शहीद ए आजम भगत सिंह की जयंती के मौके पर इस वर्ष 28 सितंबर को पटना में आयोजित लोक भवन (राजभवन) मार्च को समर्थन देने का निर्णय लिया गया। बैठक में बाढ़ की त्रासदी पर प्रस्ताव पारित कर बाढ़ तथा सूखा की भीषण विभिषिका का सामना कर रहे राज्य को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर राहत तथा बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाने की मांग की गई। राज्य परिषद ने बाढ़ ग्रस्त जिलों में बाढ़ राहत एवं पुर्नवास की मांग को लेकर आंदोलन संगठित करने का आह्वान किया तथा पार्टी के द्वारा बाढ़ राहत कार्य चलाने का निर्णय लिया।

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