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रम या ‘रम जैसी’? ओल्ड मोंक की बिक्री पर ब्रेक से कंपनी को भारी घाटा, 300 वर्कर खाली बैठे

On: October 13, 2026 10:30 AM
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नेशनल नितिन : ओल्ड मोंक ने 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के नुकसान का दावा किया है। यह दावा तब किया गया जब ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया’ (FSSAI) ने महाराष्ट्र में इस लोकप्रिय रम की बिक्री की इजाज़त देने से इनकार कर दिया, जब तक कि इसके बनाने वाली कंपनी प्रोडक्ट के लेबल पर इसे ‘रम’ के बजाय ‘रम जैसा’ (rum-like) न बताए।

यह मामला सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में आया। FSSAI की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि रेगुलेटर बिक्री की इजाज़त तभी देगा जब बनाने वाली कंपनी लेबलिंग में प्रस्तावित बदलाव के लिए सहमत हो।

300 वर्कर बिना काम के बैठे
ओल्ड मोंक बनाने वाली कंपनी ‘मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड’ के वकील वेंकटेश धोंड ने कोर्ट को बताया कि ठाणे ज़िले में अपनी यूनिट से बिक्री पर रोक के कारण कंपनी को 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि एक्साइज़ डिपार्टमेंट को भी लगभग 350 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है, जबकि लगभग 300 वर्कर बिना काम के बैठे हैं।

धोंड ने यह भी बताया कि यह प्रोडक्ट दूसरे राज्यों में बिकता रहा, जबकि महाराष्ट्र में इसकी बिक्री पर रोक लगी रही। बनाने वाली कंपनी FSSAI के रोक लगाने वाले आदेश को चुनौती दे रही है। पिछली सुनवाई में, हाई कोर्ट ने इस रोक पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। विवाद को सुलझाने की कोशिश में, कंपनी बदले हुए ड्राफ़्ट लेबल जमा करने पर सहमत हो गई थी, जिनमें उम्र बताने वाली विवादित जानकारी हटा दी गई थी और एडेड फ्लेवर (मिलाया गया स्वाद) होने की बात साफ़ तौर पर बताई गई थी।

हालांकि, रेगुलेटर ने बदले हुए लेबल को मंज़ूरी नहीं दी और दोनों पक्षों के बीच बातचीत से भी गतिरोध दूर नहीं हो सका। इसके बाद कंपनी ने चीफ़ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच से मामले की मेरिट के आधार पर सुनवाई करने का अनुरोध किया। कोर्ट 23 अक्टूबर को मामले की अंतिम सुनवाई करने पर सहमत हो गया।

यह विवाद FSSAI की उन शराब उत्पादों पर आपत्तियों से जुड़ा है जिनमें रम का स्वाद मिलाया जाता है, लेकिन उन्हें पारंपरिक नामों से बेचा जाता है। रेगुलेटर का तर्क है कि बनावटी या प्राकृतिक जैसा रम का स्वाद मिलाने से शराब की असली बनावट छिप सकती है और ग्राहकों को गुमराह किया जा सकता है, जब तक कि प्रोडक्ट पर सही ढंग से फ्लेवर्ड या रम के स्वाद वाली स्पिरिट के तौर पर लेबल न लगाया जाए। FSSAI ने ‘ओल्ड मंक’ के लेबल पर उम्र से जुड़ी जानकारी, जैसे कि 7 साल पुराना ब्लेंडेड  और बहुत पुराना वैटेड पर भी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया है।

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