पंजाब नितिन : अंकुर नरूला को सुप्रीम कोर्ट बड़ा झटका लगा है। अंकुर नरूला और एक अन्य याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं मुकुल रोहतगी और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा, “हम हाई कोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।” इसके साथ ही SLP का निपटारा कर दिया गया। इस प्रकार हाईकोर्ट का 27 अगस्त 2026 का अंतरिम आदेश बरकरार है और उसे न तो रद्द किया गया और न ही उस पर कोई रोक लगाई गई।
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के अनुसार, अंकुर नरूला मिनिस्ट्री सोसाइटी और स्पिरिचुअल वेलफेयर सोसाइटी के खातों में ₹210 करोड़ से अधिक की घरेलू नकद जमा राशि की पहचान की गई है। इसके अतिरिक्त, संबंधित संस्थाओं को निर्धारित FCRA खातों के माध्यम से ₹3 करोड़ से अधिक का विदेशी अंशदान प्राप्त हुआ है। ED ने इन निधियों के स्रोत, लेन-देन, उपयोग और लाभार्थियों की जांच जारी होने की बात कही है।
जनहित याचिका में कथित चमत्कारी उपचार और फेथ हीलिंग के दावों, धर्मांतरण से जुड़े मामलों, विदेशी मिशनरियों की गतिविधियों तथा विदेशी वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हाई कोर्ट ने ED की रिपोर्ट CBI के साथ साझा करने और CBI को प्रारंभिक जांच कर अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इस जांच पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।






