पंजाब (नितिन): जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लुधियाना ने कार दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम खारिज करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को कार की बीमित घोषित कीमत (आईडीवी) का 75 प्रतिशत भुगतान करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने कंपनी को इस राशि पर शिकायत दायर करने की तारीख से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने तथा 20,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने का भी निर्देश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने रासना सभरवाल बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में 23 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता वी.वी. उद्योग की प्रोपराइटर हैं और उनकी हुंडई वरना कार का बीमा कंपनी से कराया गया था।
शिकायत के अनुसार, 21 मई 2022 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में जिरबड़ी गांव के निकट रियासत होटल के पास उनकी कार को पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में कार में सवार राधा सभरवाल और कंचन टंडन की मौके पर मौत हो गई, जबकि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस संबंध में थाना थानेसर सदर में मामला दर्ज किया गया था।
हादसे के बाद शिकायतकर्ता ने बीमा क्लेम पेश किया। बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने कार के नुकसान का आकलन 9,29,881 रुपये किया था। हालांकि, कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन का थर्ड-पार्टी बीमा प्रभावी नहीं था। कंपनी के अनुसार, थर्ड-पार्टी बीमा 28 अप्रैल 2022 को समाप्त हो चुका था, जबकि दुर्घटना 21 मई 2022 को हुई थी।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता ने दलील दी कि उसने बीमा पॉलिसी लेते समय संबंधित दस्तावेजों और वाहन की स्थिति के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की थी तथा उसका क्लेम वास्तविक था। मामले की जांच के लिए नियुक्त जांचकर्ता ने भी अपनी रिपोर्ट में क्लेम को वास्तविक और पॉलिसी के तहत विचार योग्य बताया था।
आयोग ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि बीमा कंपनी शिकायतकर्ता द्वारा महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने के आरोप को साबित करने के लिए कोई प्रस्ताव फॉर्म पेश नहीं कर सकी। आयोग ने यह भी माना कि थर्ड-पार्टी बीमा की कमी के आधार पर पूरे क्लेम को खारिज करना इस मामले की परिस्थितियों में उचित नहीं था।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के अशोक कुमार बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड सहित संबंधित फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन के मामलों में परिस्थितियों के अनुसार क्लेम को पूरी तरह खारिज करने के बजाय नॉन-स्टैंडर्ड आधार पर भुगतान किया जा सकता है।
कार की बीमित घोषित कीमत 9.50 लाख रुपये निर्धारित थी। आयोग ने इसका 75 प्रतिशत, यानी 7,12,500 रुपये, शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त, शिकायत दायर करने की तारीख से भुगतान तक 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 20,000 रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर निर्देशों का पालन करने को कहा है। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता शाम लाल घई पेश हुए।







