दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम का किया भंडाफोड़, 30 करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश

On: October 26, 2026 4:26 PM
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नेशनल नितिन : दिल्ली पुलिस ने सोमवार को बताया कि ग्रेटर नोएडा में 30 करोड़ रुपए से अधिक के क्रेडिट ट्रांजैक्शन वाले एक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है जो कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को मुहैया कराते थे। पुलिस के अनुसार यह रैकेट तब सामने आया जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई। छात्रा ने सोशल मीडिया पर एक कुर्ती का विज्ञापन देखकर ऑर्डर दिया था, जिसके बाद उसके साथ 6,450 रुपए की धोखाधड़ी की गई। 

उत्तर प्रदेश की रहने वाली और रामजस कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा और 799 रुपए का ऑर्डर देने के लिए उसे एक नंबर पर संपर्क करने को कहा गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘उसने QR कोड के जरिए 400 रुपए का एडवांस पेमेंट किया। बाद में उसे पार्सल डिलीवरी के लिए एक कॉल आया जिसमें उससे पासकोड मांगा गया। कॉलर ने उसे पासकोड जनरेट करने और रिफंडेबल चार्ज प्रोसेस करने के बहाने कई और पेमेंट करने के लिए राजी कर लिया। कुल 6,450 रुपए का भुगतान करने के बावजूद, उसे न तो पार्सल मिला और न ही पैसे वापस मिले।’ 

अधिकारी ने बताया कि 4 सितंबर को FIR दर्ज की गई जिसके बाद पुलिस टीमों ने पेमेंट मर्चेंट के जरिए पैसों को ट्रैक किया। ये पैसे ग्रेटर नोएडा की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़े बैंक खाते में पहुंचे थे। पुलिस टीम ने लगभग 200 मोबाइल नंबरों, IMEI नंबरों, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, फूड डिलीवरी ऐप व कूरियर कंपनियों से मिले डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारी ने आगे बताया कि 16 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में की गई छापेमारी के दौरान छह आरोपियों – आदित्य मिश्रा (23), आयुष वर्मा (22), अभिषेक पाल (23), हिमांशु राणा (29), राहुल कुमार (30) और गौरव पांडे (24) – को गिरफ्तार किया गया। 

इसके बाद 21 अक्टूबर को कानपुर से उदित प्रताप सिंह भदौरिया (22) को गिरफ्तार किया गया जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई है। पुलिस को पता चला है कि साइबर धोखाधड़ी से मिली रकम को ठिकाने लगाने के लिए लगभग 25 बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। ये खाते कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और लोगों के नाम पर खोले गए थे। इन खातों में 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा हुई है और अब तक अलग-अलग राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की 27 शिकायतें इस नेटवर्क से जुड़ी पाई गई हैं। 

अधिकारी ने आगे बताया, ‘पूछताछ के दौरान मिश्रा ने खुलासा किया कि उसने और उसके कुछ साथियों ने फर्जी कंपनियां बनाईं और करंट अकाउंट खोले। इन खातों को राणा और कुमार को सौंप दिया गया, जिसके बदले उन्हें हर महीने 25,000 रुपए मिलते थे। इन खातों को बैंकिंग किट और उनसे जुड़े सिम कार्ड के साथ, पांडे के जरिए मैक्सवेल और सॉलिटेयर नाम के लोगों तक पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि ये लोग US कंट्री कोड वाले फोन नंबरों का इस्तेमाल करके बातचीत करते थे।’ 

MBA ग्रेजुएट पांडे, कमीशन के आधार पर साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था। यह गिरोह खाताधारकों का इंतजाम करता था, किराए पर जगह लेता था और कंपनियां बनाकर बैंक खाते खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार करता था। पुलिस टीमों ने 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 39 पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें, 33 डेबिट कार्ड, 28 चेक बुक, 15 स्कैनर, दो लैपटॉप, पांच स्टैम्प, आधार और पैन कार्ड, तथा बैंक खातों से जुड़े 21 दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त किए गए उपकरणों और दस्तावेजों की आगे की जांच चल रही है। 

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