अमृतसर ( नितिन ): इन दिनों अमृतसर में बिना किसी सिग्नल के आम लोगों के कट रहे ई चालान सब के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इन ई चालानों से पीड़ितों का कहना है कि केवल उन्हें फोन पर चालान का एक मैसेज आ जाता है। चालान कहां कटा, क्यों कटा उसकी कोई वजह नहीं बताई जाती। इस मुद्दे को शहर की विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं ने गंभीरता से उठाते हुए स्पष्ट सड़क चिन्ह, सुचारू ट्रैफिक सिग्नल, उपयोग योग्य फुटपाथ, व्यवस्थित पार्किंग और उचित यातायात प्रबंधन उपलब्ध करवाने की भी ट्रैफिक पुलिस प्रबंधन से मांग की है। बहुत से दोपहिया एवं विशेषकर चारपहिया वाहन मालिकों का कहना है कि उनके द्वारा ट्रैफिक नियमों का पालन करने के बावजूद उनकी गाड़ियों का चालान काट दिया जाता है। चालान क्यों कटा इसकी भी कोई जानकारी नहीं होती और चालान कहां भरना है इसके बारे में भी नहीं बताया जाता।
इस संबंध में एक महिला अरुणा कुमारी ने बताया कि उनकी गाड़ी का चालान 20 सितम्बर को लगभग एक घंटे के अंतराल में अजनाला रोड के टी प्वाईंट पर दो बार कटा। जिसमें एक बार कारण रैड लाईट जंप और दूसरी बार जेबरा लाईन क्रासिंग का कारण बताया गया। अरुणा कुमारी द्वारा जब इस संबंध में 24 और 25 सितंबर को इस संबंध में विभाग के आनलाईन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवानी चाही तो वहां भी यह सुविधा उन्हें नहीं मिली। जिस पर उन्होंने ए.डी.सी.पी. ट्रैफिक को इसकी शिकायत ईमेल के जरिए भेजी लेकिन उनकी भी इस मामले में अभी तक सुनवाई नहीं हुई।
उधर इस तरह के आनलाईन चालान के मामले में अमृतसर हरियावल मंच के अध्यक्ष इंजी. दलजीत सिंह कोहली ने चालान करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नागरिक कानून का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनका यह भी उचित अधिकार है कि प्रशासन उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए और नियमों को निष्पक्ष एवं समान रूप से लागू करे। हम संबंधित अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि वे केवल चालान और जुर्माना वसूलने पर ही ध्यान न दें, बल्कि उन समस्याओं का समाधान भी करें जिनका सामना आम नागरिक प्रतिदिन करते हैं।
इसके अलावा शहर के बुद्धिजीवियों ने पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथों की स्थिति की ओर भी प्रशासन का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ पर पर्याप्त जगह ही उपलब्ध नहीं है। कहीं फुटपाथ टूटे हुए हैं, कहीं उन पर वाहनों की पार्किंग है, कहीं अतिक्रमण है और कई स्थानों पर फुटपाथ की सुविधा ही नहीं है। ऐसी स्थिति में पैदल यात्रियों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा के साथ-साथ वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी ओर, कई सड़कों पर गलत तरीके से खड़े किए गए वाहन, व्यावसायिक अतिक्रमण तथा अन्य अवरोध यातायात के लिए उपलब्ध स्थान को और कम कर देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में केवल आम नागरिकों पर जुर्माना लगाने के बजाय प्रशासन को पहले इन बुनियादी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। यातायात नियमों को लागू करने का उद्देश्य सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, न कि आम नागरिकों को परेशान करना या उन पर अनावश्यक जुर्माने का बोझ डालना।






