अमृतसर (नितिन): दीवाली व गुरु पर्व को देखते हुए अमृतसर जिला प्रशासन की तरफ से पटाखों के 10 खोखों के लिए ड्रा निकाले गए। इसके तहत डीसी दलविंदर जीत सिंह, एडीसी जनरल पल्लवी मिश्रा, डीसीपी जुगराज सिंह व अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में अलग-अलग उपस्थित लोगों की तरफ से ड्रॉ की पर्ची निकली गई।
इस बार पटाखा खोखों के लिए 674 आवेदन आए थे जिसको एक बॉक्स में बंद करके उपस्थित लोगों से लॉटरी निकाली गई और अलॉटमेंट की गई। हालांकि पटाखा व्यापारियों की मांग थी कि 10 की बजाय 15, 20 या इससे ज्यादा खोखे लगाने की अनुमति दी जाए क्योंकि जालंधर व अन्य जिलों में अमृतसर की तुलना में कहीं ज्यादा खोखे लगते हैं। इस संदर्भ में माननीय हाईकोर्ट की तरफ से लगभग 7 वर्ष पहले आदेश जारी किए गए थे कि सिर्फ 10 खोखों के ही ड्रा निकालने हैं लेकिन अब वह याचिका खत्म भी हो चुकी है। वहीं इस मामले में सवालिया निशान उस समय भी खड़ा हो गया जब यह पता चला कि जिन लोगों के ड्रॉ में नाम निकाले हैं उनके पास ना तो पटाखा कारोबार का कोई लाइसेंस है और ना ही जीएसटी विभाग का कोई नंबर है।
जानकारी के अनुसार खोखों की ब्लैक करने के लिए कुछ लोगों की तरफ से दर्जनों की संख्या में आवेदन डाले गए जिसमें फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों, अपने रिश्तेदारों व जान पहचान के लोगों के नाम पर आवेदन डाले गए थे। पता चला है कि एक व्यक्ति ने तो अकेले ही 157 आवेदन डाले थे जिसकी दो पर्चिया निकली है। हर वर्ष कुछ इसी प्रकार से हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया जाता है और ऐसे लोगों की ड्रा में पर्चिया निकलती है जिनके पास पटाखा कारोबार का ना तो कोई लाइसेंस नंबर और ना ही कोई जीएसटी नंबर होता है। असल में खोखो की ब्लैक करने वाले खोखों को कुछ बड़े पटाखा व्यापारियों के पास बेच देते हैं। पटाखा खोखे पर नाम तो ड्रा मे लाटरी निकलने वाले व्यक्ति का चलता है जबकि पटाखे किसी अन्य व्यापारी के होते हैं जो बहुत बड़ा जांच का विषय है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही भी है। इससे हाईकोर्ट के आदेशों का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लंघन होता है।






