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हिमाचल में करोड़ की हाईवे परियोजनाओं की समीक्षा, ₹15,624 करोड़ के किशाऊ प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार; जेपी नड्डा ने दिए तेजी के निर्देश

On: October 9, 2026 6:36 PM
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नेशनल नितिन : केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों की समीक्षा की। इसमें ₹55,103 करोड़ के निवेश वाली नेशनल हाईवे परियोजनाएं और ₹15,624 करोड़ की किशाऊ मल्टीपर्पस परियोजना शामिल थी, जिसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने के बाद नई गति मिली है। इस व्यापक समीक्षा में नेशनल हाईवे, ग्रामीण सड़कें, रेल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा इंफ्रास्ट्रक्चर, पनबिजली, जल संसाधन और औद्योगिक विकास शामिल थे। इसमें काम में तेज़ी लाने, लंबित मुद्दों को सुलझाने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि मंज़ूर फंड का लोगों को वास्तविक लाभ मिले।

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार, लगातार निवेश और सहयोग के ज़रिए पहाड़ी राज्य में कनेक्टिविटी को मज़बूत करने, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने और आर्थिक अवसर पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ज़ोर दिया कि राज्य सरकार को मंज़ूर फंड का सही इस्तेमाल, समय पर प्रशासनिक फ़ैसले और नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि जनहित की परियोजनाओं में देरी न हो। पहाड़ी राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर ज़ोर देते हुए नड्डा ने कहा कि सड़क और रेल कनेक्टिविटी न केवल आवाजाही के लिए, बल्कि मरीज़ों के अस्पताल पहुँचने, किसानों और बागवानी करने वालों को बाज़ार तक पहुँचने में मदद करने, पर्यटन और रोज़गार को बढ़ावा देने और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में सुविधा के लिए भी बहुत ज़रूरी है। उन्होंने ज़ोर दिया कि सुरक्षा, निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन मुख्य प्राथमिकताएँ होनी चाहिए।

छह राज्यों के समझौते के बाद किशाऊ प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ़्तार

  • सितंबर 2026 में ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित होने के बाद, ₹15,624 करोड़ की किशाऊ मल्टीपर्पस परियोजना समीक्षा का मुख्य केंद्र बन गई है।
  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच 15 सितंबर को हुए समझौते ने इस लंबे समय से अटकी परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ़ कर दिया है।
  • हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर टोंस नदी पर स्थित इस परियोजना से जल भंडारण, सिंचाई और पनबिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • राष्ट्रीय परियोजना फंडिंग व्यवस्था के तहत, केंद्र सरकार वित्तीय बोझ का लगभग 90 प्रतिशत उठाएगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत हिस्सा इसमें शामिल राज्य उठाएंगे।
  • लागू होने के बाद, इस परियोजना से लगभग 97,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने और अनुमानित 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ पनबिजली पैदा होने की उम्मीद है।
  • समीक्षा में अन्य प्रमुख जल संसाधन और ऊर्जा परियोजनाओं का भी जायजा लिया गया, जिनमें लगभग ₹7,000 करोड़ की रेणुकाजी बांध परियोजना और ₹1,800 करोड़ की लुहरी स्टेज-I पनबिजली परियोजना शामिल हैं।

₹55,103 करोड़ का हाईवे निवेश; चार प्रमुख कॉरिडोर समीक्षा के दायरे में

चर्चाओं में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर खास तौर पर ध्यान दिया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश में NHAI की परियोजनाओं में कुल ₹55,103 करोड़ का निवेश शामिल है। राज्य में 25 राजमार्गों वाला 2,592 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क है। इसमें से 1,244 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के तहत, 779 किलोमीटर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत और 569 किलोमीटर सीमा सड़क संगठन (BRO) के तहत आते हैं।

नड्डा ने चार प्रमुख कॉरिडोर – कीरतपुर-मनाली, पठानकोट-मंडी, परवाणू-शिमला और शिमला-मटौर – पर प्रगति की समीक्षा की और निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने, सुरक्षा में सुधार करने और तय समय-सीमा को पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। लगभग ₹12,939 करोड़ की लागत वाले कीरतपुर-मनाली प्रोजेक्ट के कई बड़े हिस्से पूरे हो चुके हैं, जबकि पंडोह-टकोली सेक्शन को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कॉरिडोर में कुल मिलाकर लगभग 44 किलोमीटर लंबी 31 सुरंगें (टनल) शामिल हैं। इससे मंडी, कुल्लू और मनाली के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है, साथ ही यात्रा सुरक्षित होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। लगभग ₹8,950 करोड़ के परवाणू-सोलन-शिमला बाईपास प्रोजेक्ट में परवाणू-सोलन सेक्शन का काम पूरा हो चुका है। सोलन-कैथलीघाट सेक्शन के सितंबर 2027 तक और शिमला बाईपास के सितंबर 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। पठानकोट-मंडी प्रोजेक्ट पर लगभग ₹10,805 करोड़ के काम…

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